Morning Rituals : रोज़ सुबह बस 1 लोटा जल, और चमक उठेगी आपकी किस्मत ,जानिए सूर्य को अर्घ्य देने का सही तरीका
News India Live, Digital Desk: हम में से ज्यादातर लोगों ने अपने बड़ों को सुबह-सुबह नहाकर तांबे के लोटे से सूर्य को जल चढ़ाते हुए जरूर देखा होगा. यह सिर्फ एक पुरानी परंपरा या पूजा-पाठ का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसके पीछे इतने गहरे वैज्ञानिक और ज्योतिषीय राज छिपे हैं कि जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे. ज्योतिष में तो सूर्य को सभी ग्रहों का राजा माना गया है. कहते हैं कि अगर किसी की कुंडली में सिर्फ सूर्य मजबूत हो, तो बाकी ग्रहों के बुरे प्रभाव अपने आप कम हो जाते हैं.
अगर आप जीवन में तरक्की, अच्छा स्वास्थ्य और मान-सम्मान चाहते हैं, तो रोज़ सुबह सूर्य को जल चढ़ाने की आदत डाल लीजिए. लेकिन इसका पूरा फायदा तभी मिलता है, जब इसे सही तरीके से किया जाए.
यह है सूर्य को अर्घ्य देने की सही विधि
- समय का ध्यान रखें: सूर्य को जल चढ़ाने का सबसे अच्छा समय सूर्योदय के एक घंटे के अंदर का होता है. उगते हुए सूरज की किरणें हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होती हैं.
- स्नान के बाद ही अर्घ्य दें: हमेशा नहाने के बाद साफ, धुले हुए कपड़े पहनकर ही सूर्य को जल अर्पित करें. लाल या नारंगी रंग के वस्त्र पहनना और भी शुभ माना जाता है.
- तांबे का लोटा ही क्यों? : सूर्य को अर्घ्य देने के लिए तांबे के लोटे को सबसे उत्तम माना गया है. तांबा सूर्य की धातु है. चांदी, स्टील या प्लास्टिक के बर्तन का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए.
- जल में क्या मिलाएं?: सादे जल की जगह अगर आप लोटे में थोड़ा सा गंगाजल, एक चुटकी रोली या कुमकुम, अक्षत (साबुत चावल), लाल फूल और थोड़ा गुड़ मिला लें, तो यह और भी शुभ फल देता है.
- सही दिशा और मुद्रा: हमेशा पूर्व दिशा की ओर मुंह करके ही अर्घ्य दें. जल चढ़ाते समय लोटे को दोनों हाथों से पकड़ें और सिर से ऊपर रखें. ध्यान रहे कि जल की धार आपके सिर के ऊपर से होकर सूर्य की ओर जानी चाहिए.
- गिरते जल की धार को देखें: जब आप जल चढ़ा रहे हों, तो आपकी नजरें पानी की गिरती हुई धार पर होनी चाहिए. माना जाता है कि इस धार से छनकर जब सूर्य की किरणें आपकी आंखों पर पड़ती हैं, तो इससे आंखों की रोशनी तेज होती है और मन एकाग्र होता है.
- मंत्र का जाप जरूर करें: जल चढ़ाते समय चुप न रहें. सूर्य के मंत्र "ॐ सूर्याय नमः" का जाप करते रहें. यह सबसे सरल और प्रभावी मंत्र है.
- परिक्रमा करें: अर्घ्य देने के बाद, जिस स्थान पर आप खड़े हैं, वहीं पर तीन बार घूमकर परिक्रमा करें.
- पैरों में न आए जल: सबसे जरूरी बात, अर्घ्य का जल आपके पैरों पर नहीं गिरना चाहिए. इसे अशुभ माना जाता है. इसलिए अर्घ्य किसी ऐसी जगह पर दें जहाँ सामने कोई पौधा या क्यारी हो, ताकि सारा जल सीधे जमीन या पौधे की जड़ों में चला जाए.
सूर्य को जल देने के फायदे क्या हैं?
- आत्मविश्वास बढ़ता है: सूर्य नेतृत्व और आत्मविश्वास का कारक है. रोज़ जल देने से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है.
- स्वास्थ्य अच्छा रहता है: सुबह की धूप विटामिन-डी का सबसे अच्छा स्रोत है, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है और शरीर को ऊर्जा देता है.
- सकारात्मक ऊर्जा मिलती है: ऐसा करने से मन के सारे नकारात्मक विचार दूर होते हैं और दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ होती है.
- कुंडली में सूर्य मजबूत होता है: जिनका सूर्य कमजोर हो, उन्हें नौकरी, सेहत और मान-सम्मान से जुड़ी दिक्कतें आती हैं. अर्घ्य देने से ये सभी परेशानियां दूर होती हैं.
अगर आप भी अपनी ज़िंदगी में एक सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं, तो इस आसान सी आदत को अपनाकर देखिए. यकीन मानिए, इसके नतीजे आपको चौंका देंगे.