मानसून का विदाई कहर: कहीं डूबे गरबा पंडाल, कहीं 104 मौतें... जाते-जाते रुला रहा मौसम
सितंबर का महीना खत्म होने को है और मानसून अब अपना सामान समेटकर विदाई लेने की तैयारी में है। लेकिन ऐसा लगता है कि यह विदाई इतनी शांत नहीं होने वाली। देश के कई हिस्सों, खासकर गुजरात और महाराष्ट्र में, जाते-जाते मानसून ऐसा कहर बरपा रहा है कि लोगों की जिंदगी थम सी गई है।
गुजरात: त्योहारों की तैयारी पर फिरा पानी
गुजरात में नवरात्रि के गरबा की धूम मची हुई थी, लेकिन बुधवार को मौसम के रौद्र रूप ने इस जश्न पर पानी फेर दिया।
- वलसाड और नवसारी में इतनी तेज हवाओं के साथ बारिश हुई कि कई लोगों के घरों की छतें उड़ गईं और कच्चे मकान ढह गए।
- द्वारका में हालात इतने खराब हो गए कि कल्याणपुर को पोरबंदर से जोड़ने वाला स्टेट हाईवे पूरी तरह पानी में डूब गया। इसी दौरान एक कार पानी के तेज बहाव में बह गई।
- वडोदरा में लोगों का दिल तब टूट गया जब नवरात्रि के लिए सजाए गए खूबसूरत गरबा पंडाल तेज हवा और बारिश में ताश के पत्तों की तरह ढह गए।
महाराष्ट्र: यहां तो हालात और भी दर्दनाक हैं
अगर बात महाराष्ट्र की करें, तो यहां बारिश और बाढ़ ने मातम पसरा दिया है।
- मराठवाड़ा क्षेत्र की हालत सबसे नाजुक है। यहां के 8 जिलों के 3,000 से भी ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में हैं।
- सबसे दुखद बात यह है कि बारिश और बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में अब तक 104 लोगों की जान जा चुकी है। अकेले नांदेड़ जिले में 28 लोगों की मौत हुई है।
- विकास का पहिया जैसे थम सा गया है। लगभग 2,700 किलोमीटर सड़कें और 1,500 से ज्यादा पुल बाढ़ के पानी में या तो बह गए हैं या बुरी तरह टूट गए हैं।
- बच्चों की पढ़ाई पर भी इसका गहरा असर पड़ा है। 1,000 से ज्यादा स्कूल और सैकड़ों सरकारी इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इन्हीं हालातों को देखते हुए महाराष्ट्र बोर्ड ने 12वीं के परीक्षा फॉर्म भरने की तारीख 20 अक्टूबर तक बढ़ा दी है।
कब मिलेगी इस आफत से राहत?
मौसम विभाग का कहना है कि पूरे देश से मानसून के पूरी तरह विदा होने में अभी समय है और यह 15 अक्टूबर तक हो सकता है। यानी, अभी कुछ दिन और कुछ राज्यों को ऐसे ही मौसम का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल, लाखों लोग इस आस में जी रहे हैं कि यह बरसाती आफत जल्द खत्म हो और उनकी जिंदगी वापस पटरी पर लौट सके।