Mirzapur Secret: अगर अली फज़ल जिद पर न अड़ते, तो कट जाता गुड्डू भैया का यह सबसे खूंखार सीन
News India Live, Digital Desk : मिर्जापुर' सिर्फ़ एक वेब सीरीज नहीं, बल्कि हम सब के लिए एक इमोशन है। गुड्डू पंडित का भौकाल हो या मुन्ना भैया का एटीट्यूड, इसका नशा आज तक उतरा नहीं है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस सीरीज का एक ऐसा सीन है, जिसके बिना 'मिर्जापुर' अधूरा लगता, वो असल में कैंसिल होने वाला था?
जी हाँ, यह किस्सा खुद अली फज़ल (Ali Fazal) ने सुनाया है। अगर उस दिन शूटिंग सेट पर अली अपनी "जिद" पर नहीं अड़ते, तो शायद हमें गुड्डू भैया का वो खूंखार अवतार देखने को नहीं मिलता।
चलिए, आपको शूटिंग के उस दिन की पूरी इनसाइड स्टोरी (Inside Story) बताते हैं।
ढलती शाम और डायरेक्टर की टेंशन
यह किस्सा 'मिर्जापुर' सीजन 1 के उस सीन का है, जहाँ गुड्डू पंडित (अली फज़ल) रति शंकर शुक्ला को मारने जाते हैं। याद है न वो सीन? जहाँ गुड्डू भैया पहले हिंदी वर्णमाला (क, ख, ग...) सुनाते हैं और फिर गोली मारते हैं? वो सीन अपने आप में रोंगटे खड़े करने वाला था।
हुआ यूँ कि जिस दिन यह सीन शूट होना था, शाम हो रही थी। सूरज तेजी से ढल रहा था और नैचुरल लाइट (Natural Light) ख़त्म हो रही थी। फिल्ममेकिंग में रोशनी का बहुत महत्व होता है। डायरेक्टर और टेक्निकल टीम को लगा कि अब अँधेरा हो जाएगा, और यह सीन बहुत भारी है, इसे शूट करना मुमकिन नहीं होगा।
मेकर्स ने लगभग मन बना लिया था कि "आज पैक-अप करते हैं, यह सीन अब नहीं हो पाएगा।" उसे कैंसिल लिस्ट में डाला जा रहा था।
गुड्डू भैया बोले- "बस एक मौका दो!"
आम तौर पर एक्टर पैक-अप सुनकर खुश हो जाते हैं, लेकिन अली फज़ल उस वक्त 'गुड्डू पंडित' के किरदार में पूरी तरह डूबे हुए थे। उन्होंने रट्टा लगाया हुआ था और वो उस गुस्से और जुनून को ठंडा नहीं होने देना चाहते थे।
अली ने मेकर्स को रोका और कहा, "यार, प्लीज इसे कैंसिल मत करो। लाइट जा रही है न? कोई बात नहीं, मैं इसे एक टेक (One Take) में कर दूंगा।"
डायरेक्टर को रिस्क लग रहा था क्योंकि अगर एक बार में सही शॉट नहीं आया, तो पूरा दिन बर्बाद हो जाता। लेकिन अली के कॉन्फिडेंस के आगे सबको झुकना पड़ा। उन्होंने कैमरा रोल करने को कहा।
और फिर रचा गया इतिहास...
अली फज़ल कैमरे के सामने आए। लाइट जा ही रही थी कि उन्होंने वो पूरा 'क, ख, ग' वाला डायलॉग और रति शंकर शुक्ला को मारने वाला सीन एक सांस में, बिना किसी गलती के पूरा कर दिया। वो शॉट इतना परफेक्ट था कि सेट पर मौजूद सब लोग सन्न रह गए।
अली बताते हैं कि यह सब किस्मत का खेल था। उन्हें वो सब याद था और वो बस उस इमोशन को बाहर निकालना चाहते थे। अगर वो सीन अगले दिन के लिए टल जाता, तो शायद उसमें वो 'नेचुरल पागलपन' नहीं आ पाता जो आज हमें स्क्रीन पर दिखता है।
अब आगे क्या?
दोस्तों, इसी शिद्दत का नतीजा है कि 'मिर्जापुर' आज एक कल्ट क्लासिक बन चुकी है। अब तो 'मिर्जापुर: द फिल्म' की भी चर्चा है। देखते हैं, उसमें अली फज़ल क्या नया धमाल मचाते हैं।
आपकी राय क्या है?
आपको गुड्डू भैया का कौन सा डायलॉग या सीन सबसे ज्यादा पसंद है? क्या वो 'क ख ग' वाला सीन आपका भी फेवरेट है? कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं!