Ministry of Education : स्कूलों में 11 लाख बच्चे कम हुए, पर बेटियों के दाखिले ने जगाई उम्मीद की नई किरण

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News India Live, Digital Desk: Ministry of Education : भारत की स्कूली शिक्षा को लेकर एक बड़ी और हैरान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है। शिक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी UDISE+ (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस) रिपोर्ट के मुताबिक, 2024-25 के शैक्षणिक सत्र में स्कूलों में बच्चों के कुल दाखिले में 11 लाख की कमी आई है। यह आंकड़ा निश्चित तौर पर चिंता बढ़ाने वाला है, लेकिन इसी रिपोर्ट में एक ऐसी बात भी है जो दिल को सुकून देती है और भविष्य के लिए एक अच्छी तस्वीर पेश करती है।

इस बड़ी गिरावट के बावजूद, स्कूलों में लड़कियों के दाखिले की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। यह दिखाता है कि समाज की सोच बदल रही है और अब माता-पिता अपनी बेटियों को स्कूल भेजने में पीछे नहीं हट रहे हैं।

कहां आई है सबसे ज्यादा गिरावट?

रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा कमी प्री-प्राइमरी यानी नर्सरी और केजी जैसी छोटी कक्षाओं में देखने को मिली है। इसका एक बड़ा कारण यह भी हो सकता है कि कोरोना महामारी के बाद बच्चों की जन्म दर में कमी आई और फर्जी या डुप्लीकेट दाखिलों पर रोक लगाने के लिए व्यवस्था को सख्त किया गया है। 2023-24 में जहां कुल दाखिला 25.46 करोड़ था, वहीं 2024-25 में यह घटकर 25.35 करोड़ रह गया।

लड़कियों ने मारी बाजी

इस पूरी तस्वीर का सबसे सकारात्मक पहलू लड़कियों की शिक्षा है। जहां लड़कों के दाखिले में कमी आई है, वहीं लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio - GER) बेहतर हुआ है। प्राथमिक कक्षाओं से लेकर उच्च माध्यमिक (12वीं) तक, हर स्तर पर लड़कियों की भागीदारी बढ़ी है। खास तौर पर उच्च शिक्षा में तो लड़कियों का GER पहली बार लड़कों से आगे निकल गया है, जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे अभियानों की सफलता को भी दिखाता है।

और क्या कहती है रिपोर्ट?

  • स्कूलों में शिक्षकों की संख्या में भी इजाफा हुआ है, जिससे छात्र-शिक्षक अनुपात में सुधार हुआ है।
  • कंप्यूटर, इंटरनेट और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं पहले से ज्यादा स्कूलों तक पहुंची हैं।

कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट एक मिली-जुली तस्वीर पेश करती है। एक तरफ बच्चों की कुल संख्या में कमी एक चुनौती है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है। वहीं दूसरी तरफ, शिक्षा के क्षेत्र में लड़कियों की बढ़ती भागीदारी यह साबित करती है कि भारत सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और आने वाला कल निश्चित रूप से बेटियों का होगा।