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April 13 2026 01:05 pm

Mesh Sankranti 2026 : सूर्य का मेष राशि में प्रवेश, सतुआ संक्रांति पर करें ये खास उपाय; चमकेगी किस्मत और करियर

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News India Live, Digital Desk : हिंदू धर्म में संक्रांति का विशेष महत्व है, और जब सूर्य देव अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करते हैं, तो इसे 'मेष संक्रांति' कहा जाता है। साल 2026 में मेष संक्रांति का यह पर्व बेहद खास संयोग लेकर आ रहा है। उत्तर भारत के कई हिस्सों में इसे 'सतुआ संक्रांति' के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन से सौर वर्ष की शुरुआत होती है और यह दिन दान-पुण्य के साथ-साथ करियर में सफलता के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है।

सतुआ संक्रांति का धार्मिक महत्व और परंपरा

सतुआ संक्रांति मुख्य रूप से सत्तू के दान और सेवन से जुड़ी है। माना जाता है कि भीषण गर्मी की शुरुआत के समय सत्तू का सेवन शरीर को शीतलता प्रदान करता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने के बाद सत्तू, गुड़, घड़ा और मौसमी फलों का दान करना अक्षय फल प्रदान करता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन सूर्य देव की विशेष पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है।

करियर में सफलता के लिए अचूक उपाय

मेष संक्रांति के दिन सूर्य देव को जल अर्पित करना (अर्घ्य देना) सबसे फलदायी माना गया है। यदि आप अपने करियर या व्यवसाय में तरक्की की तलाश में हैं, तो इस दिन तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें लाल चंदन, लाल फूल और अक्षत डालकर 'ॐ सूर्याय नमः' मंत्र का जाप करते हुए सूर्य को अर्घ्य दें। इसके साथ ही, इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना प्रशासनिक सेवाओं और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे जातकों के लिए विशेष लाभकारी सिद्ध हो सकता है।

पितरों का आशीर्वाद और दान-पुण्य

इस पावन तिथि पर पितरों के निमित्त तर्पण करने का भी विधान है। सतुआ संक्रांति पर मिट्टी के घड़े में पानी भरकर और उस पर सत्तू रखकर दान करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किया गया दान न केवल वर्तमान जीवन के कष्टों को दूर करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुख-समृद्धि के द्वार खोलता है। दान में जल, छाता, चप्पल और सत्तू का विशेष महत्व बताया गया है।

सूर्य के राशि परिवर्तन का राशियों पर प्रभाव

सूर्य का मेष राशि में आना सभी 12 राशियों को प्रभावित करेगा। मेष राशि सूर्य की उच्च राशि है, इसलिए यह समय ऊर्जा और साहस का प्रतीक है। विशेष रूप से मेष, सिंह और धनु राशि के जातकों के लिए यह समय नए कार्यों की शुरुआत के लिए उत्तम है। वहीं, अन्य राशियों के लिए यह संयम और आत्म-मंथन का काल है। ग्रहों की इस स्थिति का लाभ उठाने के लिए रविवार के दिन नमक का सेवन कम करने और लाल वस्त्र धारण करने की सलाह दी जाती है।