Many rules changed in the country: UPI, NPS, क्रेडिट कार्ड भुगतान सहित प्रमुख परिवर्तन

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News India Live, Digital Desk: Many rules changed in the country:   1 जुलाई से देश भर में कई बड़े वित्तीय और बैंकिंग नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं, जो सीधे तौर पर आम नागरिकों के जीवन और उनके वित्तीय लेन-देन को प्रभावित कर रहे हैं. ये बदलाव यूपीआई भुगतान से लेकर बीमा कवरेज और बैंक से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को कवर करते हैं.

सबसे पहले, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) से जुड़े नियम बदले हैं. शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा से संबंधित भुगतान की सीमा को बढ़ाया गया है. अब शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों में यूपीआई के जरिए पांच लाख रुपये तक का भुगतान आसानी से किया जा सकेगा. पहले यह सीमा एक लाख रुपये थी, जिससे छात्रों की फीस और मेडिकल बिल जैसी बड़ी भुगतान राशियों में लोगों को दिक्कत होती थी. भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने हाल ही में इसे बढ़ाने का निर्णय लिया था, जिसका उद्देश्य इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना है.

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के निकासी नियमों में भी परिवर्तन आया है. पेंशन नियामक PFRDA के निर्देशानुसार, अब NPS से आंशिक या पूरी निकासी करने के लिए डॉक्यूमेंट अपलोड करने की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है. इसके बजाय, ग्राहक अपनी पहचान, पता और बैंक खाते का ऑनलाइन सत्यापन कर सकते हैं, जिसके लिए आधार लिंक किए गए मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा. इस बदलाव से NPS निकासी की प्रक्रिया और अधिक आसान हो गई है.

प्रधान मंत्री जन धन योजना (PMJDY) के तहत खोले गए खातों से एटीएम नकद निकासी को लेकर भी कुछ स्पष्टीकरण जारी किए गए हैं. जिन ग्राहकों के खाते निष्क्रिय हो गए थे या जिन पर बैंक ने शुल्क लगाया था, उनके लिए बैंक खाते में पर्याप्त राशि होने पर मुफ्त एटीएम नकद निकासी फिर से संभव है, बशर्ते उन्होंने अपना KYC पूरा कर लिया हो. पहले कुछ मामलों में तकनीकी कारणों से यह सुविधा अवरुद्ध हो रही थी.

क्रेडिट कार्ड से किए जाने वाले बिल भुगतान के लिए अब भारत बिल पेमेंट सिस्टम (BBPS) का उपयोग करना संभव हो गया है. पहले बीबीपीएस प्लेटफॉर्म बिजली, पानी, गैस और बीमा प्रीमियम जैसे विभिन्न बिलों के भुगतान की सुविधा प्रदान करता था. अब क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान भी इस सुविधाजनक और सुरक्षित प्लेटफॉर्म के जरिए किया जा सकेगा.

बैंक लॉकर समझौतों से जुड़े नियम भी अब सख्त हो गए हैं. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए दिशानिर्देशों के अनुसार, बैंक लॉकर सेवाओं को लेकर पारदर्शिता और ग्राहकों की सुरक्षा बढ़ाई गई है. यह अनिवार्य हो गया है कि बैंकों और ग्राहकों के बीच संशोधित लॉकर समझौता हो, जिसमें क्षति या नुकसान की स्थिति में बैंक की जवाबदेही स्पष्ट हो. ग्राहकों को जल्द से जल्द इस समझौते पर हस्ताक्षर करने का आग्रह किया गया है.

मोटर वाहन थर्ड पार्टी बीमा के प्रीमियम दरों में भी संभावित रूप से संशोधन हो सकते हैं. IRDAI जैसी नियामक संस्थाएं मोटर वाहन बीमा के संबंध में नियमित रूप से समीक्षा और संशोधन करती हैं, जिसका उद्देश्य सड़कों पर सभी हितधारकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उचित प्रीमियम दरें निर्धारित करना है.

आयकर से जुड़े नियमों में भी निवेश संबंधी महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं. टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड योजनाओं के लिए नए प्रकार के दस्तावेजीकरण या रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को लागू किया गया है, जिसके तहत निवेशकों को अपनी विशिष्ट निवेशों का खुलासा करने के लिए नए फॉर्म या प्रक्रियाओं का पालन करना होगा. इसका उद्देश्य करदाताओं को बेहतर सुविधाएं देना और कर चोरी पर रोक लगाना है.

कुल मिलाकर, इन सभी बदलावों का उद्देश्य डिजिटल लेनदेन को सुरक्षित बनाना, वित्तीय प्रक्रियाओं को आसान करना, ग्राहकों की सुरक्षा बढ़ाना और वित्तीय नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करना है, ताकि देश की वित्तीय व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता और दक्षता लाई जा सके.

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