Mantras for Peace of Mind : सिर्फ 5 मिनट की ये आदत बदल देगी आपकी पूरी जिंदगी, दिन बनेगा सफल और मन रहेगा शांत
News India Live, Digital Desk: Mantras for Peace of Mind : आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुबह आंख खुलते ही ज्यादातर लोग सबसे पहले अपना मोबाइल फोन चेक करते हैं। ऑफिस की ईमेल, सोशल मीडिया की नोटिफिकेशन और दुनिया भर की खबरों के बीच हमारा दिन एक तनाव और हड़बड़ी के साथ शुरू होता है। नतीजा यह होता है कि हम दिन भर बेचैन, थके हुए और चिड़चिड़े महसूस करते हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारी प्राचीन परंपराओं में दिन की शुरुआत करने का एक ऐसा शक्तिशाली तरीका बताया गया है, जो न केवल आपके दिन को सफल बना सकता है, बल्कि आपके मन को भी आश्चर्यजनक रूप से शांत रख सकता है? यह तरीका है सुबह उठते ही कुछ विशेष मंत्रों का जाप करना।
ये मंत्र सिर्फ कुछ शब्द नहीं हैं, बल्कि ये शक्तिशाली ध्वनि कंपन हैं जो आपके अंदर एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। इन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल करने के लिए आपको सिर्फ 5 मिनट का समय चाहिए।
सुबह उठते ही सबसे पहले करें यह काम
1. अपनी हथेलियों को देखें (कर दर्शनम्)
जैसे ही आपकी आंख खुले, बिस्तर पर बैठे-बैठे ही अपने दोनों हाथों की हथेलियों को जोड़कर उन्हें ध्यान से देखें और इस मंत्र का जाप करें:
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥
अर्थ: इस मंत्र का अर्थ है, "मेरी हथेली के अग्र भाग में देवी लक्ष्मी, मध्य भाग में देवी सरस्वती और मूल भाग में भगवान विष्णु (गोविंद) निवास करते हैं। सुबह-सुबह मैं अपनी हथेलियों में ही इन देवों के दर्शन करता हूं।"
क्यों है यह खास?: यह मंत्र आपको याद दिलाता है कि आपके कर्म (हाथ) ही आपके भाग्य का निर्माण करते हैं। आपके हाथों में ही धन (लक्ष्मी), ज्ञान (सरस्वती) और शक्ति (गोविंद) का वास है। इस भावना के साथ दिन की शुरुआत करने से आपका आत्मविश्वास बढ़ता है और आप सही कर्म करने के लिए प्रेरित होते हैं।
धरती पर पैर रखने से पहले मांगें क्षमा
हथेलियों के दर्शन के बाद, धरती पर अपना पहला कदम रखने से पहले धरती माता को प्रणाम करें और इस मंत्र के साथ उनसे क्षमा मांगें:
समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डले।
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे॥
अर्थ: "हे समुद्र रूपी वस्त्र धारण करने वाली, पर्वतों को अपने स्तनों पर धारण करने वाली और भगवान विष्णु की पत्नी, पृथ्वी देवी, मैं आपको नमस्कार करता हूं। मुझ पर कृपा करें और मुझे अपने पैरों से स्पर्श करने के लिए क्षमा करें।"
क्यों है यह खास?: यह मंत्र हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सम्मान सिखाता है। यह हमें याद दिलाता है कि जिस धरती पर हम चलते हैं, वह पूजनीय है। इस भावना से दिन की शुरुआत करने से हमारे अंदर विनम्रता का भाव आता है।
सभी ग्रहों और देवताओं का लें आशीर्वाद
इसके बाद आप स्नान के समय या पूजा घर में इस मंत्र का जाप कर सकते हैं, जिसमें सभी प्रमुख देवी-देवताओं और ग्रहों का आह्वान किया गया है:
ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्॥
अर्थ: "ब्रह्मा, विष्णु, शिव (त्रिपुरारी), सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु - ये सभी मेरे दिन को मंगलमय बनाएं।"
क्यों है यह खास?: यह एक बहुत ही शक्तिशाली मंत्र है जो आपको ब्रह्मांड की सभी दिव्य शक्तियों से जोड़ता है। इस मंत्र के जाप से नवग्रहों का आशीर्वाद मिलता है और दिन भर आने वाली बाधाओं से रक्षा होती है।
क्यों काम करते हैं ये मंत्र?
- सकारात्मक शुरुआत: दिन की शुरुआत ईश्वर को धन्यवाद और सकारात्मक विचारों से होती है।
- मानसिक शांति: इन मंत्रों के कंपन आपके मन को शांत करते हैं और तनाव को कम करते हैं।
- आत्मविश्वास: ये मंत्र आपको अपनी क्षमताओं का एहसास कराते हैं और आत्मविश्वास बढ़ाते हैं।
- एकाग्रता: रोज सुबह इस अभ्यास को करने से आपकी एकाग्रता और फोकस में सुधार होता है।
अपनी सुबह को मोबाइल की नीली रोशनी से नहीं, बल्कि इन शक्तिशाली मंत्रों की दिव्य ऊर्जा से शुरू करें और फिर देखें कि आपका हर दिन कितना सफल और शांत गुजरता है।