असम चुनाव में ममता दीदी की एंट्री TMC ने जारी की 17 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट, 6 मुस्लिम चेहरों पर लगाया दांव
News India Live, Digital Desk: पश्चिम बंगाल में अपनी जड़ें मजबूत करने के बाद अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पूर्वोत्तर के राज्यों में अपना विस्तार तेज कर दिया है। असम विधानसभा चुनाव के रण में कूदते हुए टीएमसी ने अपने 17 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। ममता बनर्जी की इस चाल ने राज्य के सियासी समीकरणों को पूरी तरह गरमा दिया है, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ अल्पसंख्यक मतदाताओं की भूमिका निर्णायक मानी जाती है।
असम के रण में 'खेला होबे': ममता की नई रणनीति
असम की राजनीति में अब तक मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस नीत गठबंधन के बीच देखा जा रहा था, लेकिन टीएमसी की एंट्री ने इस मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश की है। पार्टी ने अपनी पहली सूची में समाज के विभिन्न वर्गों को साधने का प्रयास किया है। जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी बंगाल की तर्ज पर असम में भी 'लोकप्रिय योजनाओं' और 'विकास के मॉडल' को मुद्दा बनाकर चुनावी मैदान में उतरी हैं।
टिकट बंटवारे में 'सोशल इंजीनियरिंग': 6 मुस्लिम उम्मीदवारों को मौका
टीएमसी की इस सूची में सबसे खास बात अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व है। पार्टी ने 17 में से 6 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है। असम की जनसांख्यिकी को देखते हुए इसे एक बड़े मास्टरस्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी उन इलाकों पर ध्यान केंद्रित कर रही है जहाँ मुस्लिम आबादी का प्रतिशत अधिक है और जहाँ कांग्रेस या एआईयूडीएफ (AIUDF) का पारंपरिक वोट बैंक रहा है। ममता बनर्जी की नजर अब इन वोटों में सेंध लगाने पर है।
भाजपा और कांग्रेस की बढ़ी मुश्किलें
टीएमसी के चुनाव लड़ने से असम में विपक्षी वोटों के बिखराव की संभावना बढ़ गई है। जहाँ एक तरफ भाजपा इसे अपने लिए फायदेमंद मान रही है, वहीं कांग्रेस के लिए यह एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर टीएमसी अल्पसंख्यक और बंगाली भाषी वोटों को अपनी ओर खींचने में सफल रहती है, तो इसका सीधा असर नतीजों पर पड़ेगा। ममता बनर्जी खुद असम में रैलियां कर पार्टी की मजबूती का अहसास कराने की तैयारी में हैं।
स्थानीय मुद्दों और 'ममता ब्रांड' पर भरोसा
पार्टी सूत्रों के अनुसार, उम्मीदवारों का चयन करते समय स्थानीय प्रभाव और जमीनी पकड़ को प्राथमिकता दी गई है। टीएमसी असम में एनआरसी (NRC) और सीएए (CAA) जैसे संवेदनशील मुद्दों को भी भुनाने की कोशिश करेगी। पार्टी का मानना है कि असम के लोग अब एक विकल्प की तलाश में हैं और ममता बनर्जी का नेतृत्व उन्हें वह विश्वास दिला सकता है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की अगली सूची में कुछ और चौंकाने वाले नाम सामने आ सकते हैं।