Madvi Hidma Killed : अमित शाह की डेडलाइन से 12 दिन पहले ही हुआ खेल , क्या सच में अंत हो गया बस्तर के राक्षस का?

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News India Live, Digital Desk: छत्तीसगढ़ के बस्तर (Bastar) के बीहड़ जंगलों से आज एक ऐसी खबर छनकर आ रही है, जो अगर सौ प्रतिशत सच साबित होती है, तो यह भारतीय सुरक्षाबलों के लिए पिछले कई दशकों की सबसे बड़ी कामयाबी होगी। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं उस नाम की जिसे सुनकर बस्तर के लोग ही नहीं, बल्कि पुलिस महकमा भी चौकन्ना हो जाता था—माड़वी हिड़मा (Madvi Hidma)

मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि नक्सलियों का सबसे खूंखार कमांडर और बटालियन नंबर 1 का चीफ हिड़मा शायद मारा गया है।

अमित शाह की डेडलाइन और 12 दिन पहले का 'धमाका'
यह खबर इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि देश के गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए एक सख्त समय सीमा (Deadline) तय की थी। चर्चा है कि उस डेडलाइन के करीब आते ही सुरक्षाबलों ने अपने ऑपरेशन इतने तेज कर दिए कि हिड़मा जैसा शातिर नक्सली भी बच नहीं पाया। रिपोर्ट्स कहती हैं कि डेडलाइन खत्म होने से ठीक 12 दिन पहले यह बड़ी कार्रवाई हुई है।

कौन था माड़वी हिड़मा?
अगर आप हिड़मा के बारे में नहीं जानते, तो जान लीजिए कि यह वही शख्स था जिसने झीरम घाटी कांड (जिसमें कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की हत्या हुई थी) से लेकर टेकुलगुड़ा मुठभेड़ (जिसमें हमारे 22 जवान शहीद हुए थे) तक की साजिश रची थी।
हिड़मा सुरक्षाबलों के लिए एक पहेली बना हुआ था। वो जंगलों का इतना पक्का खिलाडी था कि कई बार पुलिस उसके करीब पहुंची, लेकिन वो हर बार चकमा देकर निकल जाता था। उस पर 25 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये तक के इनाम की घोषणा अलग-अलग राज्यों द्वारा की गई थी।

सुरक्षाबलों के लिए बड़ी जीत
हालांकि, अभी तक शव बरामद होने या आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है (क्योंकि नक्सली अक्सर अपने बड़े नेताओं की मौत छिपा लेते हैं), लेकिन अगर हिड़मा का अंत हो गया है, तो समझ लीजिए कि बस्तर में लाल आतंक की कमर टूट गई है। यह उन सैकड़ों शहीद जवानों के परिवारों के लिए न्याय की तरह है, जिन्होंने इस खूनी संघर्ष में अपनों को खोया।

बदल रहा है बस्तर
हिड़मा का जाना सिर्फ एक नक्सली का मरना नहीं है, यह बस्तर में शांति की वापसी का संकेत है। सरकार की नई रणनीति और जवानों के अदम्य साहस ने नक्सलियों को बैकफुट पर धकेल दिया है।

अब बस इंतज़ार है उस आधिकारिक मुहर का जो देश को यह विश्वास दिला दे कि बस्तर का यह काला अध्याय अब हमेशा के लिए बंद हो चुका है।