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March 13 2026 04:17 pm

"मैडम, हमें बचा लीजिए!" - देश के लाखों दुकानदारों ने क्यों लगाई वित्त मंत्री से गुहार?

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त्योहारों का मौसम दरवाज़े पर है और आपके घर में भी बिस्किट, नमकीन, साबुन, तेल जैसी रोज़मर्रा की चीज़ें ख़त्म हो रही होंगी। आप और हम तो आसानी से दुकान पर जाकर ये सामान ख़रीद लेते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये सामान बनाने वाली कंपनी से आपकी पास की दुकान तक पहुँचता कैसे है? इस पूरी चेन की सबसे अहम कड़ी हैं 'डिस्ट्रीब्यूटर', जो देश के कोने-कोने तक सामान पहुँचाते हैं। लेकिन आज यही लाखों डिस्ट्रीब्यूटर एक बड़ी मुसीबत में हैं और उन्होंने मदद के लिए सीधे देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को चिट्ठी लिखी है।

क्या है इनकी सबसे बड़ी परेशानी?

इनकी परेशानी का नाम है GST, यानी गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स। जब भी सरकार किसी सामान पर GST की दर बदलती है, तो इन डिस्ट्रीब्यूटर्स का पूरा हिसाब-किताब गड़बड़ा जाता है। मान लीजिए, एक डिस्ट्रीब्यूटर ने किसी साबुन के 100 कार्टन पुराने 18% GST पर ख़रीदे। अब सरकार ने अचानक उस पर GST घटाकर 12% कर दिया। ऐसे में जब वो दुकानदार को माल बेचेगा, तो उसे नए रेट पर बेचना पड़ेगा। इस चक्कर में पुराने रेट पर ख़रीदे गए माल पर उसे अपनी जेब से भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

अखिल भारतीय उपभोक्ता उत्पाद वितरक संघ (AICPDF) का कहना है कि हर बार GST रेट बदलने पर उन्हें 5% से 10% तक का घाटा होता है। यह सिर्फ़ एक बार की बात नहीं है, पिछले सात सालों में कई बार ऐसा हो चुका है और हर बार इन छोटे-मोटे कारोबारियों को लाखों का नुक़सान झेलना पड़ा है।

क्या मांग कर रहे हैं डिस्ट्रीब्यूटर?

उनकी मांग बहुत सीधी और सरल है। वे चाहते हैं कि जब भी सरकार GST की दरों में कोई बदलाव करे, तो कंपनियों को ये निर्देश दिया जाए कि जो पुराना माल डिस्ट्रीब्यूटर के पास पड़ा है, उस पर हुए टैक्स के नुक़सान की भरपाई कंपनियां करें।

यह कोई नई मांग नहीं है। जब 2017 में GST लागू हुआ था, तब भी ऐसा ही संकट आया था और तब सरकार ने कंपनियों को पुराने माल पर हुए नुक़सान की भरपाई करने को कहा था। डिस्ट्रीब्यूटर चाहते हैं कि ऐसी ही व्यवस्था हमेशा के लिए बना दी जाए ताकि उन्हें बार-बार इस परेशानी से न गुज़रना पड़े।

यह मामला सिर्फ़ कुछ कारोबारियों के नफ़े-नुक़सान का नहीं है, बल्कि यह देश की उस सप्लाई चेन से जुड़ा है जो करोड़ों घरों तक रोज़मर्रा का सामान पहुँचाती है। अगर ये डिस्ट्रीब्यूटर कमज़ोर होंगे, तो इसका असर पूरे बाज़ार पर पड़ेगा और हो सकता है कि कल आपको अपना पसंदीदा सामान ख़रीदने में भी मुश्किल हो। अब देखना यह है कि वित्त मंत्री इन लाखों 'सेल्समैन' की पुकार सुनती हैं या नहीं।