Lakshmi Ganesh Puja : गणेश जी के बिना अधूरी है लक्ष्मी पूजा, जानिए क्यों होती है धन और बुद्धि की एक साथ अराधना
News India Live, Digital Desk: Lakshmi Ganesh Puja : दिवाली हो या कोई भी शुभ काम, हम अक्सर देखते हैं कि धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा हमेशा बुद्धि के देवता भगवान गणेश के साथ ही होती है। कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? क्यों धन की देवी को अपनी पूजा पूरी करने के लिए गणेश जी के साथ की जरूरत पड़ती है? इसके पीछे सिर्फ परंपरा ही नहीं, बल्कि बहुत गहरे पौराणिक और व्यवहारिक कारण छिपे हैं, जो हमें जीवन जीने का एक महत्वपूर्ण संदेश देते हैं।
कहा जाता है कि एक बार मां लक्ष्मी को अपनी शक्तियों और धन पर थोड़ा अभिमान हो गया। उन्हें लगा कि सारी दुनिया उन्हें ही पाने के लिए लालायित है और उनके बिना किसी का काम नहीं चल सकता। भगवान विष्णु ने उनके इस अभिमान को भांप लिया और उसे दूर करने का एक उपाय सोचा।
भगवान विष्णु ने मां लक्ष्मी से कहा, "हे देवी, आप निःसंदेह सर्वशक्तिशाली हैं, लेकिन एक मां होने के नाते आपकी ममता और जीवन अधूरा है, क्योंकि आपकी कोई संतान नहीं है।" यह सुनकर मां लक्ष्मी को बहुत दुख हुआ। वह अपनी सखी मां पार्वती के पास गईं और अपना दुख बताया।
कैसे बने गणेश, लक्ष्मी के 'दत्तक पुत्र'?
मां पार्वती ने जब लक्ष्मी जी की पीड़ा सुनी, तो उन्होंने अपने पुत्र गणेश को उन्हें सौंपने का विचार किया। उन्होंने लक्ष्मी जी से कहा, "आज से मेरा पुत्र गणेश आपकी भी संतान है। आप इसकी देखभाल करें।" मां लक्ष्मी, गणेश को पुत्र के रूप में पाकर बहुत प्रसन्न हुईं।
उन्होंने गणेश जी को यह वरदान दिया, "आज से मेरी हर पूजा तुम्हारे साथ ही शुरू होगी। जो कोई भी मेरी पूजा करेगा, उसे पहले तुम्हारी अराधना करनी होगी। जो ऐसा नहीं करेगा, मैं उसके पास कभी नहीं जाऊंगी।" तभी से मां लक्ष्मी के साथ हमेशा गणेश जी की पूजा की जाती है। यह कहानी हमें बताती है कि मां लक्ष्मी, गणेश जी की पालक माता हैं।
धन के साथ बुद्धि का महत्व
लक्ष्मी और गणेश की एक साथ पूजा का एक गहरा व्यवहारिक मतलब भी है।
- लक्ष्मी धन की देवी हैं: वह हमें धन, वैभव और समृद्धि देती हैं।
- गणेश बुद्धि के देवता हैं: वह हमें विवेक, बुद्धि और सही-गलत की समझ देते हैं।
सोचिए, अगर किसी व्यक्ति के पास बहुत सारा धन (लक्ष्मी) आ जाए, लेकिन उसे सही तरीके से खर्च करने की बुद्धि (गणेश) न हो, तो क्या होगा? वह धन जल्द ही नष्ट हो जाएगा। बिना बुद्धि के धन व्यक्ति को अहंकारी और गलत रास्ते पर ले जा सकता है।
इसीलिए, हम लक्ष्मी और गणेश की एक साथ पूजा करते हैं, ताकि हमारे जीवन में जो भी धन आए, उसके साथ उसे संभालने और सही जगह लगाने की बुद्धि भी आए। गणेश जी हमारे धन के रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं (विघ्न) को भी दूर करते हैं, इसलिए उन्हें विघ्नहर्ता भी कहा जाता है।
संक्षेप में, लक्ष्मी-गणेश की पूजा का असली अर्थ है - बुद्धि के साथ धन का स्वागत करना। यही जीवन में सच्ची सफलता और स्थिरता लाता है।