Kota Double Murder : जब रक्षक ही बन गया भक्षक पत्नी और 6 महीने के मासूम बेटे को मारने वाले पति को मिली फांसी की सज़ा
News India Live, Digital Desk : एक पति, जिसे अपनी पत्नी और बच्चे का सबसे बड़ा सहारा होना चाहिए, जब वही उनकी जान का दुश्मन बन जाए, तो इंसानियत पर से भरोसा उठ जाता है। कोटा की एक अदालत ने एक ऐसे ही दिल दहला देने वाले मामले में एक बहुत बड़ा और सख़्त फैसला सुनाया है, जो शायद समाज के लिए एक सबक बने।
अदालत ने जितेंद्र कुमार नाम के एक शख्स को अपनी पत्नी और सिर्फ 6 महीने के मासूम बेटे की हत्या के जुर्म में फांसी की सज़ा सुनाई है।
सिर्फ एक शक... और खत्म हो गया पूरा परिवार
यह दर्दनाक कहानी आज से करीब 6 साल पुरानी है। जितेंद्र को अपनी पत्नी पूजा के चरित्र पर शक था। यह शक का कीड़ा उसके दिमाग में ऐसा घर कर गया कि उसने इंसानियत की सारी हदें पार कर दीं। एक दिन गुस्से और शक की आग में जलते हुए उसने अपनी पत्नी पूजा पर हमला कर दिया।
लेकिन इस कहानी का सबसे दर्दनाक और घिनौना पहलू यह है कि उसने अपनी पत्नी के साथ-साथ अपनी गोद में खेलने वाले, उस 6 महीने के नन्हे से बच्चे को भी नहीं छोड़ा, जो शायद ठीक से अपने पिता का चेहरा पहचानना भी नहीं सीख पाया था। उसने दोनों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया।
अदालत ने कहा - यह 'विरल से विरलतम' अपराध है
जब यह मामला अदालत में पहुँचा और सारी सच्चाई सामने आई, तो जज भी इस हैवानियत को सुनकर सन्न रह गए। फैसला सुनाते हुए जज ने इसे 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' यानी 'विरल से विरलतम' अपराध माना। उन्होंने कहा, "एक बेबस महिला और एक ऐसा बच्चा जो खुद को बचा भी नहीं सकता, उसकी हत्या करना क्रूरता की पराकाष्ठा है। ऐसे अपराधी के लिए समाज में कोई जगह नहीं है।"
यह फैसला सिर्फ एक अपराधी के लिए सज़ा नहीं है, बल्कि उस सोच पर एक करारा तमाचा है, जो शक के नाम पर रिश्तों का गला घोंट देती है। 6 साल के लंबे इंतज़ार के बाद ही सही, लेकिन पूजा और उसके उस नन्हे फरिश्ते को इंसाफ मिल ही गया।