Hindu Festival : हरतालिका तीज का पावन पर्व ,जानें महत्व, पूजन विधि और नियम
- by Archana
- 2025-08-24 12:18:00
Newsindia live,Digital Desk: Hindu Festival : हरतालिका तीज का व्रत हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है और वे इसे अखंड सौभाग्य की कामना के साथ करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी व्रत के प्रभाव से माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था। सुहागिनों के अलावा कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा वर पाने की इच्छा से इस व्रत का पालन करती हैं। इस व्रत को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है क्योंकि इसमें महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं।
पूजा का विधान और सामग्री
हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा का बड़ा महत्व है।इस दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और नए वस्त्र धारण करके व्रत का संकल्प लेती हैं। पूजा के लिए मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमाएं बनाई जाती हैं और फिर उनकी पूजा की जाती है। पूजा के दौरान माता पार्वती को सुहाग की सामग्री और सोलह श्रृंगार अर्पित किया जाता है। पूजा में फल, फूल, बेलपत्र, शमी पत्र, धतूरा, घी, शहद और पंचामृत जैसी चीजों को शामिल करना शुभ माना जाता है।[1] व्रत की कथा सुनना इस पूजन का एक महत्वपूर्ण अंग है।
व्रत के नियम और पारण
यह व्रत निर्जला रखा जाता है, जिसका अर्थ है कि इस दौरान अन्न और जल दोनों का त्याग किया जाता है। व्रती महिलाएं पूरी रात जागकर भजन-कीर्तन करती हैं। व्रत का पारण अगले दिन यानी चतुर्थी तिथि को सूर्योदय के बाद किया जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस वर्ष हरतालिका तीज का व्रत मंगलवार, छब्बीस अगस्त को रखा जाएगा। पूजा के लिए सुबह का मुहूर्त उत्तम माना जा रहा है।
इस व्रत का धार्मिक महत्व
ऐसी मान्यता है कि जो भी सुहागिन स्त्री इस व्रत को पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ करती है, उसे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और उसके पति की आयु लंबी होती है वहीं, अविवाहित कन्याओं को सुयोग्य वर की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। इस व्रत की शुरुआत करने के बाद इसे जीवन भर रखने की परंपरा है। यदि किसी कारणवश व्रत रख पाना संभव न हो तो इसका उद्यापन करना आवश्यक माना जाता है।
Tags:
Share:
--Advertisement--