बांग्लादेश संसद में अल्पसंख्यकों का दबदबा? जानें इस बार कितने हिंदू उम्मीदवार बने सांसद, चौंकाने वाले हैं आंकड़े

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News India Live, Digital Desk: पड़ोसी देश बांग्लादेश में हाल ही में संपन्न हुए आम चुनावों के परिणाम घोषित हो चुके हैं। इन चुनावों में शेख हसीना की पार्टी 'अवामी लीग' ने एक बार फिर सत्ता पर कब्जा जमाया है। लेकिन इस बार पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी थीं कि बांग्लादेश की नई संसद (Jatiya Sangsad) में अल्पसंख्यक समुदायों, विशेषकर हिंदू समुदाय का प्रतिनिधित्व कितना है। आधिकारिक आंकड़ों ने इस बार एक दिलचस्प तस्वीर पेश की है।

कितने अल्पसंख्यक उम्मीदवार जीते?

चुनाव आयोग द्वारा जारी अंतिम परिणामों के अनुसार, इस बार कुल 4 अल्पसंख्यक उम्मीदवार संसद पहुँचने में सफल रहे हैं। हालांकि यह संख्या पिछली बार की तुलना में कम बताई जा रही है, लेकिन राजनीतिक रूप से इसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हिंदू सांसदों की संख्या और स्थिति

विस्तृत आंकड़ों पर नजर डालें तो निर्वाचित होने वाले इन 4 अल्पसंख्यक सांसदों में से अधिकांश हिंदू समुदाय से ताल्लुक रखते हैं।

पार्टी का आधार: जीत दर्ज करने वाले ये सभी उम्मीदवार शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के टिकट पर या निर्दलीय के रूप में चुनावी मैदान में थे।

क्षेत्रीय प्रभाव: इन उम्मीदवारों ने उन क्षेत्रों में जीत हासिल की है जहाँ अल्पसंख्यक आबादी का घनत्व अधिक है।

पिछले चुनावों से तुलना

अगर हम पिछले चुनावों (2018) की तुलना करें, तो उस समय अल्पसंख्यक सांसदों की संख्या लगभग 18 थी। इस बार संख्या में आई यह भारी गिरावट चिंता का विषय मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक अस्थिरता और कुछ क्षेत्रों में चुनाव के बहिष्कार के कारण इस बार अल्पसंख्यकों की भागीदारी और जीत के आंकड़ों पर असर पड़ा है।

शेख हसीना सरकार का रुख

अवामी लीग ने हमेशा खुद को एक धर्मनिरपेक्ष (Secular) पार्टी के रूप में पेश किया है। प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने संबोधन में बार-बार दोहराया है कि बांग्लादेश में सभी धर्मों के लोग समान अधिकार रखते हैं। हालांकि, संसद में घटती संख्या के बीच अब यह देखना होगा कि नई सरकार में अल्पसंख्यक हितों के लिए क्या विशेष कदम उठाए जाते हैं।