Karnataka High Court : बच्चों के खिलाफ यौन अपराध में महिलाएं भी हो सकती हैं आरोपी

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News India Live, Digital Desk: Karnataka High Court : कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत किसी महिला पर भी मुकदमा चलाया जा सकता है. इस निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि POCSO अधिनियम केवल पुरुषों तक सीमित नहीं है, बल्कि यदि कोई महिला भी नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराध में शामिल होती है, तो उसे भी इसके दायरे में लाया जा सकता है.

कर्नाटक उच्च न्यायालय का फैसला और उसके निहितार्थ:

  • POCSO का विस्तार: पहले ऐसी बहस थी कि POCSO अधिनियम मुख्य रूप से पुरुष अपराधियों पर लागू होता है. इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि POCSO कानून लैंगिक तटस्थ है, जिसका अर्थ है कि यह अपराध के आरोपी के लिंग पर आधारित नहीं है. चाहे अपराध करने वाला पुरुष हो या महिला, अगर नाबालिग शामिल है, तो POCSO के तहत कार्यवाही की जा सकती है.
  • बाल संरक्षण: यह निर्णय नाबालिगों के यौन शोषण से व्यापक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. यह बाल यौन शोषण को गंभीरता से लेने और किसी भी व्यक्ति, लिंग की परवाह किए बिना, को जवाबदेह ठहराने के कानून के इरादे को मजबूत करता है.
  • न्यायपालिका की व्याख्या: अदालत ने कानून की इस प्रकार व्याख्या की है कि यदि कोई महिला नाबालिग के खिलाफ यौन अपराध को बढ़ावा देती है, उसकी सुविधा देती है, या स्वयं इसमें शामिल होती है, तो उस पर POCSO के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है. यह फैसला उन स्थितियों में विशेष रूप से प्रासंगिक है जहाँ महिलाएं मानव तस्करी या यौन शोषण के नेटवर्क में सक्रिय रूप से शामिल होती हैं.
  • उदाहरण: इस तरह के फैसले पूरे देश की निचली अदालतों के लिए एक मिसाल कायम करते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि कानून के तहत सभी बच्चों को यौन शोषण से समान सुरक्षा मिले.

कर्नाटक उच्च न्यायालय का यह फैसला बच्चों की सुरक्षा और यौन अपराधों के प्रति समाज की शून्य सहिष्णुता को बढ़ावा देने में एक मील का पत्थर है. यह कानूनी व्याख्या बाल अधिकारों के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है.

 

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