जम्मू कश्मीर की वादियों से कम नहीं है केरल का कांथलूर यहाँ हर 12 साल में नीली हो जाती हैं पहाड़ियां

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News India Live, Digital Desk: जब हम 'कश्मीर' का नाम लेते हैं, तो दिमाग में सबसे पहले बर्फ, सेब के बागीचे और ठंडी हवाएं आती हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि हमारे दक्षिण भारत में भी एक ऐसी जगह छिपी हुई है, जो हुबहू कश्मीर जैसी ही लगती है? जी हाँ, इसे लोग प्यार से "केरल का कश्मीर" (Kashmir of Kerala) कहते हैं।

हम बात कर रहे हैं इडुक्की जिले के एक बेहद खूबसूरत गांव कांथलूर (Kanthalloor) की। मुन्नार के पास होने के बावजूद, यह जगह अभी तक बहुत सारे पर्यटकों की नज़रों से बची हुई है। यहाँ की शांति, फल और कुदरती अजूबे इसे बाकी हिल स्टेशनों से बिल्कुल अलग बनाते हैं।

आइये, आज आपको ले चलते हैं इन हरी-भरी वादियों के सफर पर।

1. सेब और संतरों के बागीचे (Fruit Orchards)
केरल में नारियल के पेड़ तो हर जगह दिखते हैं, लेकिन कांथलूर इकलौती ऐसी जगह है जहाँ सेब (Apples) उगते हैं। यहाँ का मौसम साल भर इतना ठंडा रहता है कि आप यहाँ सेब, संतरे, स्ट्रॉबेरी, प्लम और आडू (Peach) के पेड़ों को फलों से लदा देख सकते हैं। जब आप इन फलों के बागों में घूमते हैं, तो आपको एक पल के लिए यकीन ही नहीं होगा कि आप दक्षिण भारत में हैं। यह बिल्कुल हिमाचल या कश्मीर जैसा एहसास देता है।

2. 12 साल में होने वाला 'नीला' जादू
इस जगह को सबसे ज्यादा खास बनाता है 'नीलकुरिंजी' (Neelakurinji) का फूल। यह कोई आम फूल नहीं है, दोस्तों। यह कुदरत का ऐसा करिश्मा है जो 12 साल में सिर्फ एक बार होता है। जब ये फूल खिलते हैं, तो कांथलूर और मुन्नार की पूरी की पूरी पहाड़ियां बैंगनी-नीले रंग की चादर ओढ़ लेती हैं।

सोचिये, जहाँ तक नज़र जाए, वहां तक सिर्फ नीला रंग! पिछली बार ये 2018 में खिले थे, और अब लोग 2030 का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। लेकिन चिंता मत कीजिये, भले ही आप नीलकुरिंजी न देख पाएं, लेकिन यहाँ के धुंध भरे पहाड़ और हरियाली आपको निराश नहीं करेंगे।

3. हवा में चंदन की खुशबू
क्या आपने कभी सोचा है कि असली चंदन के जंगल (Sandalwood Forest) कैसे दिखते होंगे? कांथलूर के पास ही है मरयूर (Marayoor), जो कुदरती चंदन के जंगलों के लिए मशहूर है। यहाँ की हवा में एक अलग ही भीनी-भीनी खुशबू होती है। यहाँ मिलने वाले चंदन के तेल की गुणवत्ता इतनी अच्छी होती है कि इसे "लिक्विड गोल्ड" (Liquid Gold) यानी पिघला हुआ सोना भी कहा जाता है। आप वन विभाग की इजाजत से इन जंगलों को दूर से निहार सकते हैं।

4. पाषाण युग की झलक: मुनियरा
अगर आपको इतिहास में दिलचस्पी है, तो यहाँ आपको पत्थरों से बनीं बड़ी-बड़ी गुफाएं देखने को मिलेंगी, जिन्हें 'मुनियरा' (Dolmens) कहा जाता है। माना जाता है कि ये पाषाण युग के साधुओं के विश्राम स्थल या कब्रगाहें थीं। बादलों के बीच खड़ी ये पत्थर की संरचनाएं एक अलग ही रहस्य पैदा करती हैं।

यहाँ क्यों जाएं?
अगर आप भीड़-भाड़ और शोर-शराबे से दूर, कुछ पल सुकून के बिताना चाहते हैं, तो कांथलूर बेस्ट है। यहाँ न तो बड़े-बड़े मॉल हैं और न ही ट्रैफिक का शोर। बस शुद्ध हवा, ताजे फल और पहाड़ों की खामोशी है।

तो अगली बार जब केरल का ट्रिप प्लान करें, तो अपनी लिस्ट में इस "दक्षिण के कश्मीर" को जरूर शामिल करें!