होली के पकवानों को पचाने का रामबाण है कांजी वड़ा नोट करें राजस्थान की यह पारंपरिक और चटपटी रेसिपी
News India Live, Digital Desk: होली के मौके पर गुजिया, पकोड़े और चाट खाने के बाद अक्सर पेट में भारीपन महसूस होने लगता है। ऐसे में कांजी वड़ा एक प्राकृतिक पाचक (Digestive Aid) के रूप में काम आता है। इसकी खासियत इसका खट्टा-तीखा पानी है, जिसे राई (पीली सरसों) की मदद से फर्मेंट (Ferment) किया जाता है।
1. चटपटी कांजी तैयार करने की विधि
कांजी को तैयार होने में 2 से 3 दिन का समय लगता है, इसलिए इसे होली से पहले ही बना लेना चाहिए।
सामग्री: 2 लीटर पानी (उबालकर ठंडा किया हुआ), 2 बड़े चम्मच पीली या काली राई (दरदरी पिसी हुई), 1 छोटा चम्मच काला नमक, 1 छोटा चम्मच सादा नमक, आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, एक चुटकी हींग और थोड़ी सी हल्दी।
बनाने का तरीका:
एक कांच के जार या मिट्टी के बर्तन में पानी भरें।
इसमें राई, नमक, मिर्च, हल्दी और हींग डालकर अच्छी तरह मिलाएं।
जार का मुंह मलमल के कपड़े से बांध दें और इसे 2-3 दिन के लिए धूप में या किसी गर्म जगह पर रखें।
जब पानी में खटास आ जाए, तो समझ लीजिए आपकी कांजी तैयार है।
2. नरम और स्पंजी वड़े बनाने का तरीका
सामग्री: 1 कप मूंग की दाल (भीगी हुई), तलने के लिए तेल, चुटकी भर हींग और नमक।
बनाने का तरीका:
भीगी हुई मूंग दाल को बिना पानी या बहुत कम पानी के साथ दरदरा पीस लें।
दाल को 5-7 मिनट तक अच्छी तरह फेंटें जब तक कि वह हल्की और फूल न जाए। (पानी में डालकर चेक करें, अगर दाल तैरने लगे तो बैटर तैयार है)।
गरम तेल में छोटे-छोटे वड़े तल लें।
तलने के बाद वड़ों को सीधे गुनगुने नमक वाले पानी में 10-15 मिनट के लिए डाल दें।
3. सर्विंग और स्मोकी फ्लेवर (Dhungar Technique)
वड़ों को पानी से निचोड़कर तैयार कांजी के पानी में डाल दें।
प्रो टिप (धुंगार): असली राजस्थानी स्वाद के लिए एक जलता हुआ कोयला एक छोटी कटोरी में रखकर कांजी के जार के बीच में रखें। कोयले पर थोड़ा घी और हींग डालें और जार को 5 मिनट के लिए ढंक दें। यह स्मोकी फ्लेवर कांजी के स्वाद को 10 गुना बढ़ा देगा।
सेहत के लिए क्यों है जरूरी?
नेचुरल प्रोबायोटिक: राई के फर्मेंटेशन से इसमें अच्छे बैक्टीरिया पैदा होते हैं जो आंतों (Gut Health) के लिए वरदान हैं।
डिटॉक्स: यह शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करता है।
कोलेस्ट्रॉल: मूंग दाल के वड़े हल्के होते हैं और राई का पानी मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त रखता है।