Kamada Ekadashi 2026 : हर मनोकामना पूरी करता है यह व्रत, जानें गंधर्व ललित और ललिता की यह पौराणिक कथा
News India Live, Digital Desk: हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी को 'कामदा एकादशी' कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, यह नए साल की पहली एकादशी होती है जो भक्तों की समस्त सांसारिक कामनाओं को पूर्ण करने वाली मानी गई है। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पौराणिक कथाओं में वर्णन है कि इस व्रत के प्रभाव से बड़े से बड़े पापों और कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। विशेष रूप से गंधर्व ललित और उनकी पत्नी ललिता की कथा इस व्रत के महत्व को जीवंत करती है।
गंधर्व ललित को जब मिला 'राक्षस' बनने का श्राप
प्राचीन काल में भोगीपुर नामक एक सुंदर नगर था, जहां राजा पुण्डरीक का शासन था। उस नगर में ललित नाम का एक गंधर्व और उसकी पत्नी ललिता रहा करते थे। दोनों के बीच अगाध प्रेम था। एक दिन राजा की सभा में ललित गान कर रहा था, लेकिन उसका ध्यान अपनी पत्नी ललिता में भटक गया। एकाग्रता भंग होने के कारण गायन में त्रुटि हो गई। राजा पुण्डरीक को जब इस अपमान का पता चला, तो उन्होंने क्रोधित होकर ललित को 'राक्षस' बन जाने का श्राप दे दिया।
ललिता की भक्ति और श्रृंगी ऋषि का मार्गदर्शन
श्राप के प्रभाव से ललित का शरीर विशाल और डरावना हो गया। वह मांस-भक्षण करने वाला राक्षस बन गया। अपने पति की यह दुर्दशा देख ललिता अत्यंत दुखी रहने लगी। वह अपने पति को इस कष्ट से मुक्त कराने के उपाय खोजने लगी। भटकते हुए वह विन्ध्याचल पर्वत पर श्रृंगी ऋषि के आश्रम में पहुंची। ऋषि ने उसकी व्यथा सुनकर उसे चैत्र शुक्ल पक्ष की 'कामदा एकादशी' का व्रत करने की सलाह दी।
व्रत के प्रभाव से मिला दिव्य स्वरूप
ऋषि के कहे अनुसार, ललिता ने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ कामदा एकादशी का व्रत किया और भगवान विष्णु से अपने पति की मुक्ति की प्रार्थना की। अगले दिन व्रत के पुण्य फल को ललिता ने अपने पति ललित को समर्पित कर दिया। व्रत के प्रभाव से ललित का राक्षस रूप तुरंत समाप्त हो गया और वह पुनः एक दिव्य और सुंदर गंधर्व बन गया। अंत में दोनों विमान पर बैठकर स्वर्ग लोक को सिधारे।
कामदा एकादशी का महत्व और फल
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन भगवान वासुदेव का पूजन और व्रत कथा का श्रवण करता है, उसे वाजपेय यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। यह व्रत न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि जाने-अनजाने में हुए पापों का प्रायश्चित करने का भी सर्वोत्तम मार्ग है। इस दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है।