Kalahasti Temple secrets : शादी, संतान, पैसा- सब मिलेगा, एक बार करा आएं इस मंदिर में राहु-केतु की पूजा
News India Live, Digital Desk: Kalahasti Temple secrets : क्या आपके हर बनते काम बिगड़ जाते हैं? क्या शादी की बात पक्की होकर टूट जाती है, संतान सुख नहीं मिल रहा या फिर आप हमेशा बीमारियों और कर्ज के बोझ तले दबे रहते हैं? ज्योतिष शास्त्र की मानें तो इन सभी समस्याओं के पीछे आपकी कुंडली में बैठे दो छाया ग्रह- राहु और केतु हो सकते हैं.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा चमत्कारी और रहस्यमयी मंदिर है, जिसे राहु-केतु दोष निवारण के लिए सबसे शक्तिशाली स्थान माना जाता है? देश-विदेश से बड़े-बड़े नेता, अभिनेता और आम लोग यहां आकर एक खास पूजा करवाते हैं और कहते हैं कि उनकी ज़िंदगी की सारी बाधाएं दूर हो जाती हैं. चलिए, आपको ले चलते हैं दक्षिण भारत के इस अद्भुत श्रीकालहस्ती मंदिर के सफर पर.
कहाँ है यह चमत्कारी मंदिर?
यह प्रसिद्ध मंदिर आंध्र प्रदेश में तिरुपति के पास स्वर्णामुखी नदी के किनारे स्थित है. यह दक्षिण भारत के सबसे महत्वपूर्ण शिव मंदिरों में से एक है. इसे 'दक्षिण का कैलाश' भी कहा जाता है.
क्यों है श्रीकालहस्ती मंदिर इतना ख़ास और रहस्यमयी?
इस मंदिर की हर बात निराली और आश्चर्य से भरी है:
- राहु-केतु का सबसे बड़ा धाम: यह भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है जो खास तौर पर राहु-केतु दोष शांति पूजा के लिए प्रसिद्ध है. मान्यता है कि इस स्थान पर पूजा कराने से इन ग्रहों के बुरे प्रभाव तुरंत खत्म हो जाते हैं.
- पंचभूतों में से एक 'वायु लिंग': यह मंदिर भगवान शिव के पंचभूत यानी पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) पर बने मंदिरों में से एक है. यहां भगवान शिव 'वायु' तत्व के रूप में विराजमान हैं. इसका प्रमाण गर्भगृह में लगातार टिमटिमाता दीपक है, जो हवा के न होने पर भी हिलता रहता है, मानो भगवान शिव सांस ले रहे हों.
- बिना छुए होती है पूजा: यहां मौजूद शिवलिंग को आज तक किसी ने स्पर्श नहीं किया है, यहां तक कि पुजारी भी नहीं. अभिषेक भी एक खास U-आकार के बर्तन से दूर से ही किया जाता है.
- श्री, काल और हस्ती की कहानी: इस मंदिर का नाम तीन जीवों के नाम पर पड़ा है- श्री (मकड़ी), काल (सर्प) और हस्ती (हाथी). पौराणिक कथा के अनुसार, इन तीनों ने यहां भगवान शिव की घोर तपस्या करके मोक्ष प्राप्त किया था. इसीलिए यहां भगवान 'श्रीकालहस्तीश्वर' के नाम से पूजे जाते हैं.
- अद्भुत भक्त की कथा: यह मंदिर महान शिव भक्त कण्णप्प की कथा से भी जुड़ा है, जिन्होंने शिवलिंग से निकलते खून को रोकने के लिए अपनी आंखें निकालकर चढ़ा दी थीं.
कैसे होती है राहु-केतु दोष शांति पूजा?
इस पूजा को करवाने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. यह पूजा मंदिर परिसर में ही organised तरीके से की जाती है. अलग-अलग टिकट लेकर आप यह पूजा करवा सकते हैं. मान्यता है कि इस पूजा को करने के बाद व्यक्ति को पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए और सीधे अपने घर चले जाना चाहिए. ऐसा करने से राहु-केतु के दोष वहीं छूट जाते हैं और व्यक्ति का जीवन फिर से पटरी पर आ जाता है.
अगर आप भी जीवन में किसी ऐसी समस्या से जूझ रहे हैं जिसका कोई हल नहीं मिल रहा, तो एक बार श्रीकालहस्ती मंदिर में महादेव के दर्शन और राहु-केतु दोष की पूजा आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं होगी.