सिर्फ सेल्फी लेना काफी नहीं गोवा से हिमालय तक, दुनिया अब भारत से सीख रही है घूमने का असली सलीका

Post

News India Live, Digital Desk : दोस्तों, क्या आपने महसूस किया है कि आजकल घूमने का मतलब थोड़ा बदल गया है?कुछ साल पहले तक हमारा ट्रिप कैसा होता था? सुबह जल्दी उठो, फटाफट नाश्ता करो, एक लिस्ट लेकर निकलो, 10 'पॉइंट्स' पर जाओ, सेल्फी लो और थक-हारकर होटल लौट आओ। इसे कहते थे"पैसा वसूल ट्रिप"। लेकिन अब, हम और आप बदल रहे हैं, और साथ में बदल रहा है पूरी दुनिया का घूमने का नजरिया।

आजकल एक नया शब्द खूब चर्चा में है'इंटेंशनल ट्रैवल' (Intentional Travel)। सुनने में थोड़ा भारी-भरकम लगता है, लेकिन इसका मतलब बहुत प्यारा और सीधा है। इसका मतलब है—"बिना मकसद के न भागना"। यानी आप कहीं सिर्फ इसलिए नहीं जा रहे क्योंकि वो जगह इंस्टाग्राम पर फेमस है, बल्कि आप इसलिए जा रहे हैं ताकि आप वहां जाकर कुछ महसूस कर सकें, कुछ सीख सकें और अपनी भागदौड़ वाली जिंदगी को थोड़ी देर के लिए "पॉज" कर सकें।

और सबसे गर्व की बात पता है क्या है? इस मामले में हमारा देश भारत (India) पूरी दुनिया को रास्ता दिखा रहा है।

गोवा से हिमालय तक: सब बदल रहा है
सोचिए, पहले गोवा (Goa) का मतलब क्या होता था? बस पार्टी, सस्ता ड्रिंक और शोर-शराबा। लेकिन आज गोवा में ही ऐसे कई टूरिस्ट हैं जो किसी शांत कोने में योगा रिट्रीट ढूँढ रहे हैं, वहां के स्थानीय लोगों के साथ खाना बनाना सीख रहे हैं या मिट्टी के बर्तन बनाना (Pottery) सीख रहे हैं। लोग अब वहाँ "हंगामा" करने नहीं, "ठहरने" जा रहे हैं। इसे कहते हैं 'स्लो ट्रैवल' (Slow Travel)

वहीं दूसरी तरफ, हिमालय की वादियां हैं। अब लोग सिर्फ मैगी खाने पहाड़ों पर नहीं जा रहे। वे वहां मेडिटेशन (Meditation) करने जा रहे हैं, पहाड़ों की चुप्पी को सुनने जा रहे हैं। ऋषिकेश और केरल जैसे शहर दुनिया के लिए 'वेलनेस हब' बन चुके हैं।

हम ये क्यों कर रहे हैं?
महामारी के बाद से हमें समझ आ गया है कि मानसिक शांति (Mental Peace) से बढ़कर कुछ नहीं। 'इंटेंशनल ट्रैवल' हमें मौका देता है कि हम बाहरी दुनिया के साथ-साथ अपने अंदर की दुनिया को भी एक्स्प्लोर करें। हम स्थानीय संस्कृति को करीब से जानना चाहते हैं, न कि बस बस की खिड़की से देखना।

भारत ही क्यों लीडर है?
क्योंकि भारत के पास वो सब कुछ है जो एक इंसान की आत्मा को चाहिए। आध्यात्मिकता, योग, आयुर्वेद और गजब की विविधता। विदेशी पर्यटक अब फाइव स्टार होटलों की जगह भारत के गांवों (Rural Tourism) का अनुभव लेना चाहते हैं। वे देखना चाहते हैं कि असली भारत कैसे जीता है।

तो दोस्तों, अगली बार जब आप बैग पैक करें, तो लिस्ट मत बनाइए कि "क्या-क्या देखना है"। बस ये सोचिए कि "कैसा महसूस करना है"। यकीन मानिए, इस 'मकसद वाली यात्रा' का नशा ही अलग है!