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April 20 2026 12:59 pm

बिहार में शराबबंदी पर फिर बिफरे जीतन राम मांझी, नीतीश सरकार को घेरा, समीक्षा की उठाई मांग

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News India Live, Digital Desk: बिहार की राजनीति में 'शराबबंदी' का मुद्दा एक बार फिर गर्मा गया है। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने अपनी ही गठबंधन सरकार की शराबबंदी नीति पर तीखा हमला बोला है। मांझी ने आरोप लगाया है कि शराबबंदी के नाम पर राज्य में केवल गरीबों और दलितों को प्रताड़ित किया जा रहा है, जबकि बड़े तस्कर और रसूखदार लोग इस कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं। उनके इस बयान ने बिहार के सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

"जेल जाने वाले 50% लोग समाज के कमजोर तबके से"

जीतन राम मांझी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बिहार की जेलों में शराबबंदी कानून के तहत बंद लोगों में से 50 प्रतिशत से अधिक लोग आर्थिक रूप से पिछड़े और गरीब समाज से आते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई गरीब 50-100 ग्राम शराब पीता है, तो उसे तुरंत जेल भेज दिया जाता है, लेकिन जो बड़े सिंडिकेट चला रहे हैं और होम डिलीवरी करवा रहे हैं, उन पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? मांझी ने साफ कहा कि इस कानून का क्रियान्वयन (Implementation) पूरी तरह फेल हो चुका है और यह केवल गरीबों के दमन का हथियार बन गया है।

शराब माफिया और सिस्टम की साठगांठ का आरोप

मांझी यहीं नहीं रुके, उन्होंने सिस्टम पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि शराब माफिया अब इतने ताकतवर हो गए हैं कि वे चुनाव लड़ रहे हैं और जीत भी रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पुलिस और प्रशासन के निचले स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत से ही राज्य में शराब का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। मांझी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अपील की कि वे इस नीति की व्यवहारिकता पर गंभीरता से विचार करें और गुजरात मॉडल की तरह बिहार में भी इसे और अधिक प्रभावी और व्यवहारिक बनाने के लिए समीक्षा करें।

राज्य को हो रहे भारी आर्थिक नुकसान का जिक्र

केंद्रीय मंत्री ने शराबबंदी से हो रहे राजस्व नुकसान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के कारण बिहार को हर साल अरबों रुपये का आर्थिक नुकसान हो रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि जनता का पैसा शराब खरीदने के लिए दूसरे राज्यों में जा रहा है क्योंकि पड़ोसी राज्यों से महंगे दामों पर शराब मंगवाई जा रही है। मांझी के अनुसार, यह पैसा अगर राज्य के खजाने में आता, तो बिहार के विकास कार्यों में तेजी आ सकती थी।

गठबंधन के भीतर बढ़ी तकरार?

जीतन राम मांझी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में चुनाव और राजनीतिक समीकरणों को लेकर हलचल तेज है। हालांकि जेडीयू (JDU) और बीजेपी (BJP) शराबबंदी के फायदों को गिनाती रही है, लेकिन मांझी के लगातार हमलों ने सरकार के भीतर ही मतभेदों को उजागर कर दिया है। विपक्ष ने भी मांझी के सुर में सुर मिलाते हुए सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने सहयोगी दल के इस कड़े विरोध पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।