यूट्यूबर और ट्रस्ट संचालक गिरफ्तार, अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलकर परीक्षा में 'सेटिंग' कराने का था आरोप

यूट्यूबर और ट्रस्ट संचालक गिरफ्तार, अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलकर परीक्षा में 'सेटिंग' कराने का था आरोप

झारखंड में सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं और खासकर बहुप्रतीक्षित झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। परीक्षा में धांधली, पेपर लीक और सेटिंग के मामलों की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) और सीआईडी (CID) के हाथ एक बहुत बड़ी सफलता लगी है। जांच एजेंसियों ने इस हाई-प्रोफाइल स्कैम में संलिप्त एक शातिर यूट्यूबर और एक ट्रस्ट संचालक को धर दबोचा है। आरोप है कि ये दोनों आरोपी भोले-भाले और मेहनत करने वाले उम्मीदवारों से सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपए की अवैध वसूली कर रहे थे और परीक्षा की चयन प्रक्रिया में भारी फेरबदल यानी 'सेटिंग' कराने का काला कारोबार चला रहे थे। इस ताजा गिरफ्तारी के बाद से झारखंड के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में सनसनी फैल गई है, और यह सवाल फिर से खड़ा हो गया है कि आखिर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले इस रैकेट के तार कहां-कहां तक जुड़े हुए हैं।

क्या है पूरा मामला और कैसे खुला JSSC CGL परीक्षा में धांधली का यह जाल?

झारखंड में सरकारी नौकरियों के लिए आयोजित होने वाली परीक्षाओं में पारदर्शिता और सुचिता को बनाए रखना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है, और जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) परीक्षा भी इससे अछूती नहीं रह पाई। परीक्षा संपन्न होने के बाद से ही लगातार यह शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ संगठित गिरोह और सॉल्वर गैंग सक्रिय हैं जो अभ्यर्थियों को पास कराने का झांसा देकर उनसे भारी-भरकम रकम ऐंठ रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड सरकार और जांच एजेंसियों ने इस पूरे सिंडिकेट की गहराई से छानबीन शुरू की, जिसमें कई चौंकाने वाले नाम सामने आए। पुलिस की गिरफ्त में आए यूट्यूबर और ट्रस्ट संचालक पर यह आरोप है कि वे सोशल मीडिया और अपने संपर्कों के माध्यम से नौकरी के आकांक्षी युवाओं से संपर्क करते थे और उन्हें सिस्टम के भीतर ऊंचे रसूख का हवाला देकर परीक्षा पास कराने का झूठा भरोसा देते थे।

यूट्यूबर और ट्रस्ट संचालक की भूमिका: सोशल मीडिया की आड़ में चल रहा था अवैध कारोबार

जांच एजेंसियों की शुरुआती पूछताछ में यह बात सामने आई है कि गिरफ्तार किया गया यूट्यूबर और ट्रस्ट का मुख्य संचालक बेहद शातिर तरीके से अपनी ऑनलाइन गतिविधियों की आड़ में इस गैरकानूनी धंधे को अंजाम दे रहा था। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी पहुंच और युवाओं के बीच लोकप्रियता का गलत इस्तेमाल करते हुए ये लोग छात्रों का विश्वास जीतते थे और फिर प्रश्नपत्र लीक कराने या ओएमआर शीट (OMR Sheet) में हेरफेर करने के नाम पर लाखों रुपए वसूलते थे। इन जालसाजों ने कई बेरोजगार युवाओं को अपने जाल में फंसाया और उनसे पैसे ऐंठे, जिससे न केवल योग्य उम्मीदवारों का हक मारा गया बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए। सीआईडी और एसआईटी की टीमों ने तकनीकी सर्विलांस (Technical Surveillance) और पुख्ता सबूतों के आधार पर इन दोनों आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी कर इन्हें गिरफ्तार किया है, और इनके पास से कई डिजिटल उपकरण व दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।

परीक्षा में 'सेटिंग' करने वाले गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी एजेंसियां

झारखंड सीआईडी और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई यहीं रुकने वाली नहीं है, क्योंकि इस पूरे रैकेट में कई अन्य बड़ेचोरों, बिचौलियों और सरकारी तंत्र से जुड़े कुछ भ्रष्ट लोगों के भी शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। गिरफ्तार किए गए यूट्यूबर और ट्रस्ट संचालक से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड कौन है और परदे के पीछे रहकर इन तक जानकारियां कौन पहुंचा रहा था। राज्य के बेरोजगार युवाओं और छात्र संगठनों ने इस खुलासे के बाद दोषियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल चलाकर सबसे कड़ी सजा देने की मांग की है, ताकि भविष्य में कोई भी गिरोह युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत न जुटा सके। सरकार और जांच एजेंसियां भी यह सुनिश्चित करने में जुटी हैं कि इस भ्रष्टाचार में शामिल एक-एक चेहरे को बेनकाब किया जाए और कानून के कटघरे में खड़ा किया جائے۔

युवाओं के भविष्य और पारदर्शी भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर उठ रहे गंभीर सवाल

JSSC CGL परीक्षा में सामने आए इस तरह के बड़े घोटालों ने एक बार फिर से देश भर की प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गहरी चिंताएं पैदा कर दी हैं। रात-दिन मेहनत करने वाले लाखों युवा जब अपनी योग्यता के बल पर परीक्षा देने उतरते हैं, तब ऐसे पैसे के दम पर नौकरी खरीदने वाले लोग उनकी मेहनत पर पानी फेर देते हैं। इस पूरी घटना से यह सबक मिलता है कि प्रशासनिक स्तर पर परीक्षा तंत्र को और अधिक फुल-प्रूफ (Foolproof) बनाने की जरूरत है ताकि किसी भी बिचौलिए या यूट्यूबर को सिस्टम में सेंध लगाने का मौका न मिल सके। झारखंड के आम नागरिकों और छात्रों की निगाहें अब इस जांच के अगले कदमों पर टिकी हैं, और हर कोई यही उम्मीद कर रहा है कि जांच एजेंसियां इस सिंडिकेट की जड़ों तक पहुंचकर दूध का दूध और पानी का पानी कर देंगी।