क्यों अंचल कार्यालय के गेट पर कुर्सी लगाकर बैठे जेएमएम विधायक संजीव सरदार

क्यों अंचल कार्यालय के गेट पर कुर्सी लगाकर बैठे जेएमएम विधायक संजीव सरदार

झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक विधायक का अनोखा और हैरान करने वाला विरोध प्रदर्शन सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। पूर्वी सिंहभूम जिले की पोटका विधानसभा सीट से झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कद्दावर और लोकप्रिय विधायक संजीव सरदार (Sanjiv Sardar) ने जनता के कामों में हो रही भारी लाचारी और सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक ऐसा अनूठा तरीका अपनाया जिसने सभी को चौंका दिया। विधायक संजीव सरदार अचानक पोटका अंचल कार्यालय (Circle Office) के मुख्य गेट पर अपनी कुर्सी लगाकर धरने पर बैठ गए और जब एक-एक करके सरकारी कर्मचारी और अधिकारी कार्यालय में प्रवेश करने लगे, तो उन्होंने किसी को डांटने या धमकाने के बजाय सम्मान के साथ माला पहनानी शुरू कर दी। इस तीखे और अनोखे तंज के पीछे का राज जब खुला, तो अधिकारी शर्मिंदा हो गए और अंचल कार्यालय में हड़कंप मच गया।

समय पर ऑफिस न आने वाले बाबुओं के खिलाफ विधायक का अनूठा 'गांधीगिरी' विरोध

अक्सर यह देखने को मिलता है कि सरकारी कार्यालयों में आम जनता अपने छोटे-छोटे जाति प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र, जमीन के दाखिल-खारिज (Mutation) और पैमाइश के मामलों को लेकर सुबह से चक्कर काटती रहती है, लेकिन बाबू लोग समय पर अपनी कुर्सियों पर नहीं मिलते। पोटका के विधायक संजीव सरदार को अपने निर्वाचन क्षेत्र के दौरे के दौरान लगातार यह शिकायतें मिल रही थीं कि अंचल कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी अपनी मनमानी कर रहे हैं और जनता के आवेदनों को महीनों तक लटका कर रखते हैं। इस व्यवस्था से तंग आकर विधायक ने फैसला किया कि वे खुद सुबह-सुबह अंचल कार्यालय के मुख्य द्वार पर पहुंचेंगे और लेट-लपेट आने वाले कर्मचारियों का स्वागत माला पहनाकर करेंगे। जैसे ही कर्मचारी समय के बाद या बिना तय समय पर दफ्तर पहुंचे, विधायक ने उन्हें माला पहनाई और हाथ जोड़कर कहा कि 'आप लोग जनता के सेवक हैं, जरा समय पर आइए और गरीबों के काम कीजिए।'

भ्रष्टाचार और लापरवाही पर फूटा गुस्सा, जनता के कामों में देरी बर्दाश्त नहीं

अंचल कार्यालय के गेट पर कुर्सी लगाकर बैठे विधायक संजीव सरदार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पोटका विधानसभा क्षेत्र की जनता ने उन्हें अपना नुमाइंदा चुनकर इसलिए भेजा है ताकि उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। विधायक ने मौके पर मौजूद मीडिया और स्थानीय नागरिकों से बातचीत करते हुए कहा कि जमीन के म्यूटेशन, भूमि सुधार और अंचल से जुड़े अन्य कार्यों के नाम पर आम जनता से किस तरह अवैध वसूली की जा रही है और फाइलों को जानबूझकर दबाया जा रहा है, यह अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यशैली में सुधार नहीं आया, तो यह 'गांधीगिरी' वाला विरोध प्रदर्शन और भी उग्र रूप ले सकता है और वे सीधे राज्य स्तर पर इसकी शिकायत मुख्यमंत्री व राजस्व विभाग से करेंगे।

अंचल कार्यालय में मचा हड़कंप, अधिकारियों ने मांगी माफी और दिए सुधार के निर्देश

विधायक के इस अचानक और कड़े तेवर वाले प्रदर्शन से अंचल कार्यालय में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में अंचल अधिकारी (CO) और अन्य प्रमुख कर्मचारी अपनी कुर्सियों से उठकर बाहर आए और विधायक से मुलाकात की। अधिकारियों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए भरोसा दिलाया कि अब से सभी कार्यालय समय पर खुलेंगे और जनता के लंबित पड़े मामलों का निस्तारण तय समय सीमा के भीतर कर दिया जाएगा। विधायक के इस अनोखे और जनता के पक्ष में उठाए गए कदम की स्थानीय स्तर पर जमकर तारीफ हो रही है। लोग कह रहे हैं कि यदि हर जनप्रतिनिधि इसी तरह प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ सड़कों पर उतर आए, तो सरकारी दफ्तरों में सुस्त पड़ी व्यवस्था अपने आप पटरी पर आ जाएगी।

आधुनिक एआई और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के दौर में विधायक के अनोखे प्रदर्शन की चर्चा

आज के डिजिटल युग में, जब गूगल, बिंग और आधुनिक एआई सर्च इंजनों (GEO) पर 'JMM MLA Sanjiv Sardar Circle Office Protest' सबसे तेजी से ट्रेंड करने वाला विषय बन गया है, तब इस तरह के स्थानीय जनप्रतिनिधियों के कदम प्रशासनिक जवाबदेही तय करने का एक बड़ा माध्यम बन चुके हैं। सोशल मीडिया पर विधायक के माला पहनाने वाले इस वीडियो और तस्वीरों को हजारों बार शेयर किया जा चुका है। यह घटना इस बात का सटीक उदाहरण है कि कैसे राजनीतिक इच्छाशक्ति और रचनात्मक विरोध के जरिए जनता की आवाज को ताकतवर प्रशासनिक तंत्र तक पहुंचाया जा सकता है।