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'गद्दार कौन?' झारखंड में घायल कांग्रेस की दर्द भरी आवाज से कांपा सियासी गलियारा, अब सीएम हेमंत सोरेन के फैसले पर टिकी निगाहें

झारखंड के सियासी समंदर में एक बार फिर बहुत बड़ा तूफान खड़ा हो गया है। इस बार यह टकराव सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर ही बेहद खुलकर सामने आ गया है। 'गद्दार कौन?' के इस बड़े और चुभते हुए सवाल के साथ इस समय घायल कांग्रेस की दर्द भरी आवाज सीधे मुख्यमंत्री आवास की दीवारों से टकरा रही है। गठबंधन सरकार में खुद को उपेक्षित और राजनीतिक रूप से चोटिल महसूस कर रही कांग्रेस ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब सूबे की पूरी जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर टिक गई हैं कि वे इस अंदरूनी कलह को शांत करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

अपनों के ही धोखे से घायल हुई कांग्रेस का फूटा गुस्सा

झारखंड कांग्रेस के भीतर लंबे समय से सुलग रही असंतोष की चिंगारी ने अब एक बड़ी ज्वाला का रूप ले लिया है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों और विधायकों का दर्द है कि सरकार में शामिल होने के बावजूद उनके कार्यकर्ताओं और नेताओं को वह मान-सम्मान और तवज्जो नहीं मिल रही है जिसके वे हकदार हैं। कुछ महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों और हालिया राजनीतिक नियुक्तियों में कांग्रेस को दरकिनार किए जाने के बाद से यह नाराजगी चरम पर पहुंच गई है। कांग्रेस खेमे से उठ रही आवाजें साफ इशारा कर रही हैं कि गठबंधन के भीतर ही कुछ ऐसे तत्व मौजूद हैं जो पीठ में छुरा घोंपने का काम कर रहे हैं, जिससे पार्टी संगठन को भारी नुकसान पहुंच रहा है।

मुख्यमंत्री आवास के इर्द-गिर्द सिमटी सूबे की सियासत

इस समय रांची का कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास झारखंड की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु बना हुआ है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और नाराज विधायकों की बैठकों का दौर जारी है और उनकी मांगें बेहद स्पष्ट हैं। कांग्रेस अब केवल वादों से संतुष्ट होने के मूड में बिल्कुल नहीं है। उनकी यह दर्द भरी आवाज और तीखे सवाल सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कानों तक पहुंच रहे हैं। जेएमएम (JMM) के रणनीतिकारों के लिए भी यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई है क्योंकि वे अच्छी तरह जानते हैं कि कांग्रेस के समर्थन के बिना सरकार को सुचारू रूप से चलाना आसान नहीं होगा।

क्या हेमंत सोरेन बचा पाएंगे गठबंधन की नैया?

अब गेंद पूरी तरह से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पाले में है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि क्या सीएम सोरेन कांग्रेस की इन जायज-नाजायज मांगों के आगे झुकेंगे या फिर कोई नया बीच का रास्ता निकालेंगे। एआई (AI) और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के ट्रेंड्स को देखें तो झारखंड में 'गठबंधन की स्थिरता' को लेकर इंटरनेट पर सर्च वॉल्यूम अचानक से बहुत ज्यादा बढ़ गया है। अगर हेमंत सोरेन ने समय रहते इस असंतोष को दूर नहीं किया, तो आने वाले समय में झारखंड की जेएमएम-कांग्रेस सरकार के लिए मुश्किलें काफी ज्यादा बढ़ सकती हैं।

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