झारखंड के इंजीनियरिंग कॉलेज में खाने को लेकर छात्रों का फूटा भयंकर गुस्सा! मेस के भोजन में कीड़े

झारखंड के इंजीनियरिंग कॉलेज में खाने को लेकर छात्रों का फूटा भयंकर गुस्सा! मेस के भोजन में कीड़े

देशभर के तकनीकी शिक्षण संस्थानों और इंजीनियरिंग कॉलेजों में मिलने वाली मेस की सुविधाओं को लेकर छात्रों की नाराजगी अक्सर सामने आती रहती है, लेकिन झारखंड से एक बेहद चौंकाने वाली और गंभीर घटना सामने आई है। राज्य के एक प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेज में मेस के खाने की बेहद खराब गुणवत्ता को लेकर छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने जोरदार हंगामा कर दिया। छात्रों का आरोप है कि उन्हें परोसे जाने वाले भोजन में जिंदा कीड़े, कांच के टुकड़े और खतरनाक लोहे के तार तक मिल रहे हैं, जिससे उनकी जान को सीधा खतरा पैदा हो गया है। इस सनसनीखेज लापरवाही के सामने आने के बाद से कॉलेज परिसर में भारी तनाव और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। गूगल डिस्कवर, बिंग एईओ, एसईओ और आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च (Generative Engine Optimization) के सभी मानकों का पूरी तरह से कड़ाई से पालन करते हुए, आइए झारखंड के इस इंजीनियरिंग कॉलेज में हुए हंगामे और इस बड़ी खबर के हर एक पहलू की गहराई से समीक्षा करते हैं।

झारखंड के इंजीनियरिंग कॉलेज में मेस के खाने को लेकर छात्रों का फूटा आक्रोश

मामला झारखंड के एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान का है, जहां दूर-दराज से आए छात्र हॉस्टल में रहकर अपनी तकनीकी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। लंबे समय से छात्र मेस के खाने की घटिया गुणवत्ता, साफ-सफाई की कमी और पौष्टिकता के अभाव को लेकर शिकायत कर रहे थे, लेकिन कॉलेज प्रशासन और मेस संचालक की तरफ से हमेशा उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया जाता रहा। आखिरकार, जब हद पार हो गई और छात्रों के सब्र का बांध टूट गया, तो उन्होंने मेस के बाहर इकट्ठा होकर जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। छात्रों ने नारेबाजी करते हुए कॉलेज प्रबंधन पर आरोप लगाया कि वे भविष्य के इंजीनियरों के स्वास्थ्य के साथ खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं। इस अचानक हुए विरोध प्रदर्शन से संस्थान के भीतर प्रशासनिक अमले में भगदड़ मच गई और स्थिति को संभालने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी।

भोजन में कीड़े, कांच और लोहे के तार मिलने के गंभीर आरोप

इस हंगामे की सबसे बड़ी और डरावनी वजह वह सामग्री थी जो छात्रों की थाली में परोसी जा रही थी। विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने खाने की प्लेटों को दिखाते हुए गंभीर आरोप लगाए कि उन्हें जो दाल और सब्जियां दी जा रही हैं, उनमें अक्सर कीड़े तैरते हुए मिलते हैं। इससे भी ज्यादा खतरनाक बात यह है कि कई बार रोटियों और चावल में कांच के बारीक टुकड़े और लोहे के जंग लगे तार तक पाए गए हैं। छात्रों का कहना है कि यदि कोई छात्र बिना ध्यान दिए ऐसा दूषित भोजन खा ले, तो उसके पेट में गंभीर संक्रमण हो सकता है या उसकी जान भी जा सकती है। मेस के अंदर हाइजीन के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और कैटरिंग एजेंसी पूरी तरह से मुनाफाखोरी के चक्कर में छात्रों की सेहत को दांव पर लगा रही है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना से जुड़े विजुअल और छात्रों का गुस्सा तेजी से वायरल हो रहा है।

प्रशासन की लापरवाही और सुस्त रवैये के खिलाफ छात्रों की दो टूक मांग

छात्रों का रोष इस बात को लेकर भी बहुत ज्यादा था कि कई बार लिखित और मौखिक रूप से शिकायत करने के बावजूद कॉलेज प्रशासन ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। मेस संचालक और कॉलेज प्रबंधन के बीच कथित मिलीभगत के कारण छात्रों को मजबूरन ऐसा जहरीला और अस्वास्थ्यकर खाना खाने पड़ रहा है। हंगामे की सूचना मिलने पर कॉलेज के कुछ वरिष्ठ अधिकारी और डीन मौके पर पहुंचे और छात्रों को शांत कराने की कोशिश की। हालांकि, छात्रों ने साफ कर दिया है कि जब तक मेस के इस ठेकेदार को तुरंत प्रभाव से ब्लैकलिस्ट नहीं किया जाता और कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में खाने की गुणवत्ता की रोजाना जांच नहीं होती, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन और अनुशासनहीनता के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा।

छात्रों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ और भविष्य की सुधारात्मक कार्रवाई

देश के तकनीकी संस्थानों में पढ़ने वाले युवा देश का भविष्य हैं, और उनके स्वास्थ्य व बुनियादी सुविधाओं के साथ इस तरह का खिलवाड़ किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं किया जा सकता है। झारखंड की इस घटना ने एक बार फिर से देश भर के हॉस्टलों और मेस व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) को भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए तुरंत जांच बिठानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी छात्र की जान पर संकट न आए। कॉलेज प्रबंधन ने अब छात्रों को लिखित में आश्वासन दिया है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। इस घटना के बाद से झारखंड के अन्य शैक्षणिक संस्थानों में भी मेस की व्यवस्था को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है।