रांची के सिल्ली में रानीहारा डैम का टूटा बांध: कई गांवों में घुसा बाढ़ का पानी

रांची के सिल्ली में रानीहारा डैम का टूटा बांध: कई गांवों में घुसा बाढ़ का पानी

झारखंड की राजधानी रांची से सटे ग्रामीण इलाके सिल्ली से इस वक्त एक बहुत बड़ी और चिंताजनक प्राकृतिक आपदा की खबर सामने आ रही है, जिसने स्थानीय प्रशासन और आम जनता की नींद उड़ा दी है। सिल्ली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रानीहारा डैम (Ranihara Dam) का अचानक बांध टूटने से भारी तबाही मच गई है, जिससे डैम का हजारों गैलन पानी अनियंत्रित होकर आसपास के दर्जनों गांवों में सैलाब की तरह घुस गया है। मध्य रात्रि या अचानक हुए इस जलप्रलय के कारण निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों के घरों में पानी भर गया है, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इस अप्रत्याशित घटना से सबसे बड़ा आघात किसानों पर टूटा है, क्योंकि खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल पूरी तरह से जलमग्न होकर बर्बाद हो चुकी है। इस बड़ी दुर्घटना के बाद से स्थानीय लोगों में सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन की लचर व्यवस्था के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है, क्योंकि समय पर मरम्मत न होने के कारण यह ऐतिहासिक बांध आज तबाही का कारण बन गया है।

कैसे हुआ रानीहारा डैम का बांध टूटने का यह भयानक हादसा

रांची जिले के सिल्ली प्रखंड में स्थित रानीहारा डैम लंबे समय से स्थानीय किसानों के लिए सिंचाई का एक बड़ा जरिया रहा है। पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में हो रही लगातार बारिश या जलस्तर के अत्यधिक दबाव के कारण इस पुराने और जर्जर हो चुके बांध की सहनशक्ति जवाब दे गई। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, बांध के एक हिस्से में काफी समय से रिसाव यानी लीकेज की समस्या बनी हुई थी, जिसकी कई बार लिखित और मौखिक शिकायत सिंचाई विभाग के अधिकारियों से की गई थी, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते समय रहते इसकी सुधि नहीं ली गई। नतीजतन, पानी के बढ़ते दबाव के आगे बांध का बड़ा हिस्सा अचानक तेज आवाज के साथ ढह गया और देखते ही देखते पानी का विकराल सैलाब रिहायशी इलाकों की तरफ दौड़ पड़ा। इस आकस्मिक आपदा ने एक बार फिर से इस बात को साबित कर दिया है कि किस तरह से सरकारी विभागों की अनदेखी और भ्रष्टाचार मासूम ग्रामीणों के जीवन और उनकी आजीविका के लिए एक गंभीर खतरा बन जाती है।

कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात, घरों में घुसा पानी और अफरा-तफरी का माहौल

रानीहारा डैम का बांध टूटने के बाद आसपास के दर्जनों गांवों जैसे रानीहारा, सिल्ली के निचले क्षेत्र और कई अन्य बस्तियों में अचानक पानी भर जाने से अफरा-तफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों के छतों या ऊंचे स्थानों की तरफ भागे। आधी रात या तड़के अचानक पानी के प्रवेश करने से लोगों को अपने घरेलू सामान, अनाज और मवेशियों को बचाने का मौका तक नहीं मिल पाया। कई कच्चे मकान पानी के तेज बहाव के दबाव को झेल नहीं पाए और ढह गए, जिससे परिवारों के सामने सिर छिपाने का संकट खड़ा हो गया है। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन दुर्गम रास्तों और पानी के अत्यधिक बहाव के कारण राहत और बचाव कार्यों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन द्वारा प्रभावित ग्रामीणों को सुरक्षित निकालने और उनके लिए तात्कालिक भोजन व पानी की व्यवस्था करने का प्रयास किया जा रहा है।

किसानों की सालभर की मेहनत पर फिरा पानी, धान की फसलें तबाह

इस दुर्घटना का सबसे दुखद पहलू झारखंड के मेहनतकश किसानों से जुड़ा हुआ है, जिनकी सालभर की कमाई और पसीने की फसल एक झटके में बर्बाद हो गई है। वर्तमान मौसम धान की कटाई और पकने का होता है, और सिल्ली क्षेत्र के इन खेतों में लहलहाती धान की फसलें किसानों के चेहरों पर मुस्कान ला रही थीं। लेकिन रानीहारा डैम का पानी जब खेतों में बाढ़ की तरह घुसा, तो वह अपने साथ सब कुछ बहा ले गया। हजारों एकड़ उपजाऊ भूमि पर खड़ी धान की फसल पूरी तरह से कीचड़ और पानी में डूबकर सड़ चुकी है। किसानों का कहना है कि उन्होंने बैंक से कर्ज लेकर और साहूकारों से पैसे उधार लेकर खेती में महंगे खाद, बीज और कीटनाशकों का इस्तेमाल किया था, लेकिन अब इस तबाही के बाद उनके सामने भुखमरी और आर्थिक तंगी का पहाड़ टूट पड़ा है। किसानों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से तत्काल प्रभाव से विशेष राहत पैकेज और फसल नुकसान के मुआवजे की मांग की है।

प्रशासनिक अमले की नींद टूटी, जांच और मुआवजे के आश्वासन का दौर शुरू

घटना की गंभीरता को देखते हुए रांची जिला प्रशासन के बड़े अधिकारी मौके पर रवाना हो चुके हैं और स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। सरकार की तरफ से यह निर्देश जारी किए गए हैं कि प्रभावित परिवारों को तुरंत राहत पहुंचाई जाए और जिनके घर टूटे हैं या फसलें नष्ट हुई हैं, उनका युद्ध स्तर पर आकलन किया जाए। हालांकि, ग्रामीणों का गुस्सा इस बात को लेकर है कि हर बार किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही प्रशासन जागता है। यदि समय रहते रानीहारा डैम के जीर्णोद्धार और मरम्मत का काम करवा लिया जाता, तो आज यह भयंकर तबाही देखने को नहीं मिलती। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी तूल पकड़ने की पूरी संभावना है, क्योंकि विपक्षी दलों ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाना शुरू कर दिया है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता राहत और बचाव कार्य को तेजी से पूरा करने और विस्थापितों को सुरक्षित ठिकाना देने पर टिकी हुई है।