रांची पानी टंकी हादसा: इमरजेंसी बोर्ड पर लिखे मिले सिर्फ 4 डिजिट, हेमंत सरकार की व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

रांची पानी टंकी हादसा: इमरजेंसी बोर्ड पर लिखे मिले सिर्फ 4 डिजिट, हेमंत सरकार की व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

झारखंड की राजधानी रांची से एक बेहद दर्दनाक और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने राज्य सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। रांची के जिला स्कूल परिसर में कोतवाली थाने के ठीक पीछे एक पुरानी और जर्जर पानी की टंकी को तोड़ने का काम चल रहा था, इसी दौरान वह अचानक भरभराकर नीचे गिर गई। इस भयानक हादसे में मलबे के नीचे दबने से दो गरीब मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। लेकिन इस पूरी घटना के बाद जब मीडिया और स्थानीय लोगों की नजर घटनास्थल पर लगाए गए आधिकारिक 'इमरजेंसी कॉन्टैक्ट बोर्ड' (आपातकालीन संपर्क पट्ट) पर पड़ी, तो सरकारी तंत्र की लापरवाही का ऐसा नजारा देखने को मिला जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। जान जोखिम में डालकर काम कर रहे मजदूरों के लिए लगाए गए उस बोर्ड पर मोबाइल नंबरों के केवल शुरुआती 4 डिजिट ही लिखे हुए थे और बाकी के अंकों पर क्रॉस का निशान लगा हुआ था, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया कि आखिर ऐसी स्थिति में कोई मजदूर या आम नागरिक आपातकाल के दौरान मदद के लिए कैसे संपर्क करता?

जर्जर पानी की टंकी ढहाने के दौरान हुआ हादसा और दो मजदूरों की गई जान

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रांची के व्यस्त इलाके में स्थित जिला स्कूल परिसर में पुरानी पानी की टंकी को ध्वस्त कर उसकी जगह नई संरचना का निर्माण कराया जाना था। इस खतरनाक काम को अंजाम देने के लिए जिन सुरक्षा मानकों और दिशा-निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए था, उन्हें पूरी तरह से ताक पर रख दिया गया था। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा पहले ही संबंधित एजेंसी को कड़ी चेतावनी दी गई थी, लेकिन ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की लापरवाही के चलते बुधवार की शाम यह हादसा हो गया। टंकी का भारी-भरकम ढांचा जब अचानक नीचे गिरा, तो वहां काम कर रहे मजदूर मलबे के नीचे दब गए। इस दुर्घटना में पलामू जिले के रहने वाले दो मजदूरों सत्या भुइयां और मैथली शरण महतो की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

इमरजेंसी बोर्ड बना महज दिखावा, अधिकारियों के नंबरों पर लगे थे क्रॉस

हादसे के बाद जब घटनास्थल की पड़ताल की गई तो वहां टंगे उस सूचना बोर्ड ने सबका ध्यान खींचा जिसे किसी भी बड़ी निर्माण साइट पर सुरक्षा और आपातकालीन मदद के लिए अनिवार्य रूप से लगाया जाता है। उस बोर्ड पर कार्यपालक अभियंता (Executive Engineer), साइट इंजीनियर, ठेकेदार के प्रतिनिधि और स्थानीय पुलिस स्टेशन तक के संपर्क नंबर अधूरे दर्ज थे। हैरानी की बात यह है कि सभी मोबाइल नंबरों के केवल शुरुआती चार अंक लिखकर बाकी के डिजिट्स पर क्रॉस का निशान लगा दिया गया था। बोर्ड पर केवल एम्बुलेंस के लिए '108' नंबर ही पूरा लिखा हुआ नजर आया। इस तरह के अधूरे और मजाक बन चुके इमरजेंसी बोर्ड को देखकर यह साफ हो गया कि प्रशासन कागजों पर तो सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन जमीन पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट होती है।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही पर उठ रहे बड़े सवाल

इस दर्दनाक हादसे के बाद झारखंड सरकार और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर आम जनता और विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा तीखे सवाल दागे जा रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब जर्जर और खतरनाक ढांचे को गिराने का इतना बड़ा जोखिम भरा काम चल रहा था, तब वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए थे? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था? यदि मौके पर काम कर रहे मजदूरों या किसी अन्य व्यक्ति को तुरंत किसी अधिकारी से मदद मांगनी पड़ती, तो वे इन अधूरे नंबरों के सहारे किससे संपर्क करते? इस तरह की लचर व्यवस्था यह साबित करती है कि कागजी निर्देशों के बाद जमीन पर उसकी मॉनिटरिंग करने वाला कोई नहीं है, जिसका खामियाजा अंततः गरीब और बेकसूर मजदूरों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है।

जिला प्रशासन की जांच कमेटी और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और उपायुक्त (DC) स्तर पर हरकत में आते हुए एक विशेष जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है जो यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर सुरक्षा नियमों की अनदेखी के लिए कौन जिम्मेदार था। स्थानीय लोगों और मजदूरों के परिजनों ने मांग की है कि इस लापरवाही के लिए दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। बहरहाल, यह हादसा सिर्फ दो मजदूरों की मौत का मामला नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था पर एक बड़ा तमाचा है जो विकास और निर्माण के नाम पर इंसानी जिंदगियों को ताक पर रख देती है।