क्या 2021 के यास तूफान जितना खतरनाक है अर्णब? झारखंड में भारी बारिश का अलर्ट

क्या 2021 के यास तूफान जितना खतरनाक है अर्णब? झारखंड में भारी बारिश का अलर्ट

अक्टूबर का महीना खत्म होते-होते देश के कई राज्यों में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है और एक नया चक्रवाती तूफान 'साइक्लोन अर्णब' (Cyclone Arnab) त तटीय इलाकों से लेकर अंदरूनी राज्यों तक अपनी दस्तक दे चुका है। आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटों से टकराने के बाद इस शक्तिशाली चक्रवात का असर अब झारखंड समेत पूर्वी भारत के कई हिस्सों पर साफ दिखने लगा है। मौसम विभाग (IMD) की चेतावनी के बाद झारखंड सरकार और जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद हो गए हैं। लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या साल 2021 में आए 'यास' (Yaas) तूफान की तरह यह चक्रवात भी भारी तबाही मचा सकता है? खासकर राज्य के अन्नदाता यानी किसानों की सांसे अटकी हुई हैं क्योंकि खेतों में खड़ी फसलें और हाल ही में कटी फसलें भारी बारिश की चपेट में आ सकती हैं।

साइक्लोन अर्णब और झारखंड में मौसम का ताजा हाल

बंगाल की खाड़ी से उठने वाले चक्रवाती तूफान हमेशा से तटीय और पूर्वी राज्यों के लिए चिंता का विषय रहे हैं। साइक्लोन अर्णब के प्रभाव के कारण झारखंड की राजधानी रांची समेत लगभग 9 प्रमुख जिलों में मौसम पूरी तरह खराब हो चुका है। आसमान में घने काले बादल छाए हुए हैं और लगातार रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक राज्य के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ भारी से बहुत भारी बारिश और वज्रपात (Thunderstorms and Lightning) की पूरी संभावना है। जिन जिलों के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किए गए हैं, उनमें रांची, खूंटी, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा, सारकेला-खरसावां, पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम शामिल हैं। प्रशासन ने निचले इलाकों में जलभराव और कमजोर इमारतों तथा कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचने की आशंका को लेकर लोगों को आगाह कर दिया है।

क्या 2021 के यास तूफान जितनी खतरनाक है इस चक्रवात की रफ्तार?

जब भी किसी बड़े चक्रवात का नाम सामने आता है, तो साल 2021 के मई महीने में आए 'यास' (Yaas) चक्रवात की डरावनी यादें ताजा हो जाती हैं। उस दौरान यास तूफान ने झारखंड और ओडिशा के कई जिलों में भारी तबाही मचाई थी, तेज हवाओं से पेड़ उखड़ गए थे और बड़े पैमाने पर बिजली व संपत्ति का नुकसान हुआ था। लोगों के जेहन में यही सवाल है कि क्या 'अर्णब' तूफान भी उतना ही विध्वंसक साबित होगा? मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि साइक्लोन अर्णब मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों से टकराने के बाद कमजोर पड़ रहा है, लेकिन इसके प्रभाव से आने वाले नमी युक्त बादल और डीप डिप्रेशन झारखंड जैसे राज्यों में लगातार तीन दिनों तक भारी बारिश का कारण बन रहे हैं। भले ही इसकी सीधी रफ्तार तटीय इलाकों जितनी भीषण न हो, लेकिन लगातार होने वाली मूसलाधार बारिश और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाएं जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर सकती हैं।

किसानों की बढ़ी टेंशन, धान और अन्य फसलों पर मंडराया बड़ा खतरा

इस बेमौसम बरसात और चक्रवाती संकट ने झारखंड के किसानों की नींद उड़ा दी है। राज्य के अधिकांश ग्रामीण इलाकों में इस समय धान की फसल या तो पककर तैयार है या किसान उसकी कटाई कर रहे हैं। ऐसे में अचानक आए इस चक्रवाती अलर्ट और तीन दिनों तक लगातार भारी बारिश की चेतावनी ने अन्नदाताओं की मेहनत पर पानी फेरने का अंदेशा पैदा कर दिया है। कृषि विशेषज्ञों और जिला प्रशासन ने किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। किसानों को सलाह दी गई है कि यदि फसलें कट चुकी हैं, तो उन्हें तुरंत सुरक्षित स्थानों या गोदामों में शिफ्ट कर दें ताकि वे भीगने और सड़ने से बच सकें। खेतों में जलभराव होने से धान की खड़ी फसलें जमीन पर बिछ सकती हैं, जिससे पैदावार को भारी नुकसान पहुंच सकता है। राज्य के कई जिलों में एहतियातन स्कूलों को भी बंद रखने के आदेश दिए गए हैं ताकि बच्चों को किसी प्रकार की असुविधा या खतरे का सामना न करना पड़े।

प्रशासन की तैयारी और आम नागरिकों के लिए जरूरी गाइडलाइंस

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए झारखंड सरकार और जिला प्रशासन पूरी तरह से एक्टिव मोड में आ गए हैं। रांची के डिप्टी कमिश्नर और अन्य जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों ने आपदा प्रबंधन टीम को अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है। निचले और जलभराव वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए शेल्टर होम तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा, सड़कों पर गिरे पेड़ों को तुरंत हटाने और बाधित बिजली आपूर्ति को युद्ध स्तर पर बहाल करने के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है। मौसम विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अत्यधिक आवश्यक होने पर ही अपने घरों से बाहर निकलें, खासकर पेड़ों और कमजोर बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें। वज्रपात के समय खुले स्थानों या खेतों में जाने से पूरी तरह परहेज करें। सरकार स्थिति पर लगातार पैनी नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी अनहोनी से तुरंत निपटा जा सके।