हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन के संस्कार भोज में उमड़ा जनसैलाब
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दिवंगत माता रूपी सोरेन के श्राद्धकर्म और संस्कार भोज का आयोजन उनके रामगढ़ जिले स्थित पैतृक गांव नेमरा में अत्यंत श्रद्धा, सादगी और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जीवनसंगिनी और राज्य की मातृशक्तियों में अग्रणी रहीं रूपी सोरेन को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए झारखंड के कोने-कोने से लेकर देश भर की कई नामचीन शख्सियतें नेमरा पहुंचीं। इस बड़े धार्मिक और सामाजिक आयोजन के दौरान पूरे गांव में भावुक माहौल देखा गया। राज्य के मुखिया होने के बावजूद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद अपने पैतृक घर के मुख्य द्वार और पंडालों में मौजूद रहकर आने वाले हर एक अतिथि और आम नागरिक की अगवानी करते और व्यवस्थाएं संभालते दिखाई दिए।
हेलिकॉप्टर से पहुंचे योग गुरु बाबा रामदेव, दिशोम गुरु शिबू सोरेन को बताया अपना 'गुरु'
संस्कार भोज के दौरान वीवीआईपी मेहमानों के आने का सिलसिला लगातार जारी रहा। योग गुरु स्वामी रामदेव विशेष रूप से हेलिकॉप्टर से नेमरा पहुंचे। उनके पहुंचते ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद आगे बढ़कर उनका आत्मीय स्वागत किया और उन्हें अपने पैतृक आवास के भीतर ले गए। बाबा रामदेव ने दिवंगत रूपी सोरेन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और शोकाकुल सोरेन परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। इस मौके पर बाबा रामदेव ने पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन को अपना गुरु बताते हुए कहा कि सोरेन परिवार से उनका रिश्ता बीते 25 सालों से भी अधिक पुराना है। उन्होंने रूपी सोरेन को केवल एक परिवार की सदस्य नहीं, बल्कि संथाल समाज की एक शक्तिस्वरूपा मां के रूप में याद किया।
दिग्गज नेताओं की सादगी और संथाली रीति-रिवाजों का अनूठा संगम
नेमरा में आयोजित इस विशाल संस्कार भोज में संथाल समाज की समृद्ध लोक-संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों की अद्भुत झलक देखने को मिली। सोरेन परिवार के ननिहाल और नाते-रिश्तेदारों की ओर से संथाल परंपरा के अनुसार बकरे, खाला पत्ता (साल के पत्तों की थालियां) और पारंपरिक सामग्री भेंट की गई। इस ऐतिहासिक मौके पर नेताओं की सादगी भी चर्चा का केंद्र बनी रही; जेएमएम के वरिष्ठ नेता सरफराज अहमद जहां ऑटो से नेमरा पहुंचे, वहीं पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर भी कई किलोमीटर पैदल चलकर आयोजन स्थल तक आए। हेमंत सोरेन कैबिनेट के कई मंत्री जैसे शिल्पी नेहा तिर्की, दीपक बिरुआ, सांसद महुआ माजी सहित राज्य के तमाम विधायक और प्रशासनिक अधिकारी इस पावन अवसर पर अपनी संवेदनाएं प्रकट करने पहुंचे।
सीएम हेमंत सोरेन ने खुद पंगत में घूम-घूमकर पूछा लोगों का हालचाल
नेमरा में आम और खास लोगों के लिए विशाल वाटरप्रूफ पंडाल बनाए गए थे, जहां एक साथ हजारों लोगों के बैठने और भोजन करने की व्यवस्था की गई थी। मटन, पूरी, चावल, दाल और विभिन्न मिठाइयों से सजे इस पारंपरिक भोज के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद पंडालों के बीच घूमते रहे। वे भोजन कर रहे बुजुर्गों, महिलाओं और दूर-दराज के गांवों से आए आदिवासियों के पास गए, उनके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद लिया और भोजन की व्यवस्था के संबंध में व्यक्तिगत रूप से फीडबैक लेते रहे। मुख्यमंत्री के इस आत्मीय और जमीन से जुड़े व्यवहार ने वहां मौजूद हर एक व्यक्ति का दिल जीत लिया।
अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था के बीच हजारों लोगों की सुगम आवाजाही
संस्कार भोज में जुटने वाली भारी भीड़ और कई वीवीआईपी चेहरों की मौजूदगी को देखते हुए जिला व पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पूरे इलाके में एक दर्जन से अधिक सीनियर आईपीएस अधिकारियों और दर्जनों डीएसपी सहित 2,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। मुख्य मार्गों से लेकर नेमरा गांव तक टोटो, ऑटो और विशेष बसों का संचालन किया गया ताकि दूर-दराज से आने वाले लोगों को पैदल न चलना पड़े। पूरे गांव में पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा, वाहन पार्किंग और सीसीटीवी सर्विलांस की ऐसी चाक-चौबंद व्यवस्था की गई थी कि इतने विशाल जनसैलाब के बावजूद पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से संपन्न हो गया।