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हेमंत सोरेन का मास्टरस्ट्रोक, शिबू सोरेन की जगह 'वैद्यनाथ राम' जाएंगे राज्यसभा, JMM के इस चौंकाने वाले फैसले के पीछे का पूरा सियासी गणित समझें

झारखंड के सियासी गलियारों में पिछले कई दिनों से झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस के बीच राज्यसभा की सीटों को लेकर चल रही जबरदस्त खींचतान आखिरकार पूरी तरह समाप्त हो गई है। आगामी राज्यसभा चुनाव की दो सीटों पर दोनों ही सहयोगी दलों ने आपसी सहमति से एक-एक सीट पर चुनाव लड़ने का ऐतिहासिक फैसला किया है। इस समझौते के तहत झामुमो (JMM) ने झारखंड के कद्दावर नेता और दिग्गज राजनेता शिबू सोरेन (गुरुजी) के निधन के बाद खाली हुई अपनी प्रतिष्ठित सीट पर अनुसूचित जाति (SC) समाज से आने वाले पूर्व मंत्री वैद्यनाथ राम को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ, गठबंधन धर्म निभाते हुए कांग्रेस ने अपनी सीट पर प्रणव झा को मैदान में उतारा है। जेएमएम के इस अप्रत्याशित फैसले ने राज्य की राजनीति में एक नया समीकरण पैदा कर दिया है, जिसे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का एक बेहद परिपक्व और दूरगामी मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।

आखिर कौन हैं वैद्यनाथ राम, जिन्हें जेएमएम दे रही है इतना बड़ा सम्मान

झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर राज्यसभा जा रहे वैद्यनाथ राम प्रदेश की राजनीति का कोई नया चेहरा नहीं हैं, बल्कि वे झारखंड के जमीनी और बेहद अनुभवी राजनेताओं में गिने जाते हैं। वैद्यनाथ राम वर्तमान में झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय उपाध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे लातेहार विधानसभा सीट से तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं और झारखंड सरकार में कई अहम विभागों के मंत्री के रूप में अपनी प्रशासनिक क्षमता साबित कर चुके हैं। अनुसूचित जाति (दलित वर्ग) से ताल्लुक रखने वाले वैद्यनाथ राम को देश के उच्च सदन में भेजने का फैसला कर झामुमो ने राज्य के भीतर एक नया और बेहद मजबूत सामाजिक संदेश देने की सफल कोशिश की है।

पलामू प्रमंडल में पहली बार इतिहास, एक तीर से हेमंत सोरेन ने साधे कई निशाने

वैद्यनाथ राम को प्रत्याशी बनाकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केवल अपनी पार्टी के इरादे ही साफ नहीं किए हैं, बल्कि झारखंड की राजनीति के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। राज्य गठन के बाद यह पहला मौका है जब पलामू प्रमंडल से आने वाले किसी दलित नेता को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व मिलने जा रहा है। पार्टी के संस्थापक स्वर्गीय शिबू सोरेन के जाने के बाद उनकी खाली हुई सीट को किसी आदिवासी चेहरे के बजाय एक दलित वर्ग के नेता को सौंपकर हेमंत सोरेन ने राज्य के आदिवासी-दलित (ए-डी) गठजोड़ को एक नई और बेहद मजबूत धार दे दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से आगामी चुनावों में जेएमएम को दलित वोट बैंक का भारी और एकतरफा फायदा मिल सकता है।

"सदन में वंचितों और झारखंड की बुलंद आवाज बनेंगे वैद्यनाथ राम": सीएम हेमंत सोरेन

इस महत्वपूर्ण घोषणा के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि झारखंड की वीर जनता के ऐतिहासिक संघर्षों, उनकी जन-आकांक्षाओं और सामाजिक न्याय की गूंज को देश के सबसे बड़े सदन में और अधिक मजबूती देने के लिए महागठबंधन ने पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम को झामुमो प्रत्याशी के रूप में राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि बैद्यनाथ राम की सामाजिक सरोकारों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता तथा समाज के वंचित, शोषित, गरीब और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए उनका लंबा जमीनी संघर्ष उन्हें इस गरिमामयी दायित्व के लिए सबसे उपयुक्त और योग्य उम्मीदवार बनाता है। हमें पूरा भरोसा है कि वे राज्यसभा के भीतर झारखंड के हितों और अधिकारों की सबसे प्रभावी पैरवी करेंगे।

गठबंधन धर्म के लिए JMM ने खींचे कदम, विरोधियों को दिया करारा जवाब

वैद्यनाथ राम के नाम पर मुहर लगने से पहले पिछले 48 घंटों के दौरान झामुमो के भीतर दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की मांग बेहद तेज हो गई थी। पार्टी के कद्दावर नेता व मंत्री योगेंद्र प्रसाद, हफीजुल हसन समेत कई विधायकों का साफ कहना था कि 34 विधायकों के साथ झामुमो राज्य की सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए दोनों राज्यसभा सीटों पर पहला और स्वाभाविक हक झामुमो का ही बनता है। लेकिन शनिवार को झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने केवल एक उम्मीदवार के नाम का एलान कर अपनी गहरी राजनीतिक परिपक्वता का परिचय दिया। उन्होंने अपनी ही पार्टी के नेताओं को शांत करते हुए कांग्रेस के साथ गठबंधन धर्म को तरजीह दी, जिससे विपक्षी दलों के उन दावों की हवा निकल गई जो गठबंधन में दरार की भविष्यवाणी कर रहे थे।

 

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