झारखंड में बच्चा चोर गिरोहों का बढ़ा खौफ : तीनपहाड़ गैंग का हुआ बड़ा खुलासा
झारखंड के विभिन्न जिलों से इस समय एक बेहद संवेदनशील, सनसनीखेज और चिंताजनक बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने आम नागरिकों, अभिभावकों और प्रशासनिक महकमे के होश उड़ा दिए हैं। पिछले कुछ समय से राज्य के ग्रामीण और शहरी इलाकों में छोटे बच्चों के गायब होने और बच्चा चोर गिरोहों (Child Lifter Gangs) की सक्रियता को लेकर जो अफवाहें और घटनाएं सामने आ रही थीं, उन पर अब पुलिस की जांच के बाद चौकाने वाली मुहर लग गई है। झारखंड की खुफिया और पुलिस एजेंसियों ने जांच के दौरान यह खुलासा किया है कि राज्य में पहले से ही कुख्यात 'गुलगुलिया गैंग' के सक्रिय होने के बाद अब एक नए और बेहद खतरनाक गिरोह 'तीनपहाड़ गैंग' (Tinapahar Gang) का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा खतरनाक और डरावनी बात यह सामने आई है कि इन बच्चा चोर गिरोहों के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पड़ोसी देश बांग्लादेश (Bangladesh Connection) से जुड़े हुए हैं, जिससे भारत की आंतरिक सुरक्षा और सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उत्तर प्रदेश से लेकर झारखंड तक इस बात की चर्चा है कि किस तरह संगठित अपराधी मासूम बच्चों को अगवा करके सीमा पार तस्करी करने के नापाक षड्यंत्र को अंजाम दे रहे हैं। स्थानीय पुलिस और राज्य की विशेष शाखा (Special Branch) ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई अलर्ट जारी कर दिया है और संदिग्ध ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी है ताकि इस अंतरराष्ट्रीय रैकेट का पूरी तरह से पर्दाफाश किया जा सके।
झारखंड में कैसे सक्रिय हुआ 'तीनपहाड़ गैंग' और क्या है इनका बच्चों को चुराने का खतरनाक तरीका
झारखंड पुलिस और अपराध अनुसंधान विभाग (CID) द्वारा की गई प्रारंभिक छानबीन में यह बात सामने आई है कि 'तीनपहाड़ गैंग' बेहद शातिर तरीके से अपने आपराधिक नेटवर्क का संचालन कर रहा है। यह गिरोह मुख्य रूप से रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंड्स, मेलों, बाजारों और ग्रामीण इलाकों के ऐसे घरों को अपना निशाना बनाता है जहां बच्चे अक्सर बाहर खेलते हुए नजर आते हैं। गिरोह के सदस्य भिखारी, फेरीवाले या संदिग्ध साधुओं का वेश बदलकर गांवों की रेकी करते हैं और मौका मिलते ही पलक झपकते ही मासूम बच्चों का अपहरण कर लेते हैं। बच्चों को चुराने के तुरंत बाद उन्हें सुरक्षित रास्तों से होते हुए झारखंड के सीमावर्ती जिलों और वहां से सीधे अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर की तरफ शिफ्ट कर दिया जाता है। पिछले कुछ दिनों में झारखंड के कई थानों में बच्चों के गायब होने की जो शिकायतें दर्ज कराई गई थीं, जब उनकी कड़ियों को आपस में जोड़ा गया, तो इस संगठित 'तीनपहाड़ गैंग' का नाम प्रमुखता से सामने आया। स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों के बीच इस बात को लेकर भारी दहशत का माहौल है कि वे अपने बच्चों को घर से बाहर भेजने में भी डरने लगे हैं, क्योंकि अपराधी अब दिनदहाड़े इस तरह की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
बांग्लादेश कनेक्शन का खुलासा: सीमा पार तस्करी और अवैध नेटवर्क का जाल
इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि झारखंड के इन बच्चा चोर गिरोहों के तार सीधे तौर पर पड़ोसी देश बांग्लादेश से जुड़े हुए पाए गए हैं। खुफिया एजेंसियों के हाथ लगे दस्तावेजों और पकड़े गए कुछ संदिग्ध अपराधियों से पूछताछ के दौरान यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि चोरी किए गए इन मासूम बच्चों को ऊंचे दामों पर सीमा पार तस्करी के जरिए बांग्लादेश या अन्य दूरदराज के इलाकों में बेच दिया जाता है। सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाकर इन अपराधियों द्वारा अवैध घुसपैठ और मानव तस्करी (Human Trafficking) का यह काला कारोबार चलाया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय इस रैकेट के उजागर होने के बाद अब केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां (Central Intelligence Agencies) भी झारखंड पुलिस के साथ मिलकर इस पूरे मामले की तह तक जाने में जुट गई हैं। उत्तर प्रदेश और झारखंड के बीच की सीमाओं पर भी पुलिस बल को सतर्क कर दिया गया है ताकि कोई भी संदिग्ध वाहन या व्यक्ति इस प्रकार की अवैध गतिविधियों को अंजाम देकर आसानी से फरार न हो सके।
गुलगुलिया गैंग के बाद तीनपहाड़ गैंग का आतंक, जनता में प्रशासन के खिलाफ बढ़ता रोष
झारखंड में बच्चा चोरों के आतंक का यह कोई पहला मामला नहीं है, क्योंकि इससे पहले 'गुलगुलिया गैंग' द्वारा भी इसी तरह की कई वारदातों को अंजाम दिए जाने की बात सामने आ चुकी है। लोग अभी गुलगुलिया गिरोह के खौफ से उबर भी नहीं पाए थे कि उससे भी ज्यादा खतरनाक और शातिर 'तीनपहाड़ गैंग' के सामने आने से आम जनता का गुस्सा पुलिस और प्रशासन के खिलाफ फूट पड़ा है। ग्रामीण इलाकों में लोग रात-रातभर जागकर अपने मोहल्लों और बस्तियों की खुद पहरेदारी कर रहे हैं, और कई जगहों पर तो संदिग्ध दिखने वाले बाहरी लोगों को पकड़कर पुलिस के हवाले करने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। समाजसेवियों और स्थानीय नेताओं ने सरकार से यह मांग की है कि इस प्रकार के संगठित अपराधों को रोकने के लिए तुरंत एक विशेष टास्क फोर्स (STF) का गठन किया जाए, जो युद्धस्तर पर इन गिरोहों का सफाया कर सके।
बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूलों और अभिभावकों को बरतनी होगी विशेष सावधानी
संक्षेप में कहें तो झारखंड में बच्चा चोर गिरोहों का यह बढ़ता खतरा और उनका बांग्लादेशी कनेक्शन सिर्फ एक साधारण अपराध नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद गंभीर मुद्दा बन चुका है। माता-पिता और स्कूलों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि वे बच्चों की सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें और उन्हें अकेले कहीं भी न जाने दें। पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी और जनता के सहयोग से ही इस खतरनाक नेटवर्क की कमर तोड़ी जा सकती है और मासूम बच्चों की सुरक्षित जिंदगी सुनिश्चित की जा सकती है।