पैसा दिला दीजिए, नहीं तो मर जाएंगे... झारखंड में 5 महीने से मानदेय ठप, महिला होमगार्ड की इस दर्दभरी गुहार ने झकझोरा

पैसा दिला दीजिए, नहीं तो मर जाएंगे... झारखंड में 5 महीने से मानदेय ठप, महिला होमगार्ड की इस दर्दभरी गुहार ने झकझोरा

झारखंड से एक बेहद भावुक और व्यवस्था को झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। कानून-व्यवस्था को दुरुस्त रखने में दिन-रात पुलिस के कंधे से कंधा मिलाकर ड्यूटी करने वाले होमगार्ड के जवान इन दिनों खुद दाने-दाने को मोहताज हैं। राज्य में पिछले 5 महीनों से मानदेय (सैलरी) न मिलने के कारण इन सुरक्षाकर्मियों की आर्थिक स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। इसी बीच एक महिला होमगार्ड का रोते हुए दर्द छलक पड़ा, जिसने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। बदहाली के आंसू रोती इस महिला जवान ने अधिकारियों से गुहार लगाते हुए कहा कि अगर जल्द पैसा नहीं मिला तो उनके पास मरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।

भूखमरी की कगार पर पहुंचे सुरक्षा जवान, बच्चों की पढ़ाई भी छूटी

झारखंड के विभिन्न जिलों में तैनात होमगार्ड जवानों के घरों में पिछले कई महीनों से चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। महिला होमगार्ड ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई कि 5 महीने से एक भी रुपया न मिलने के कारण राशन दुकानदारों ने अब उन्हें उधार सामान देना पूरी तरह बंद कर दिया है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि घर का खर्च चलाना तो दूर, बच्चों के स्कूल की फीस न भर पाने के कारण उनकी पढ़ाई भी छूटने की कगार पर आ गई है। बीमार बुजुर्ग माता-पिता के इलाज के लिए दवाइयां खरीदने तक के पैसे इन जवानों के पास नहीं बचे हैं।

रात-दिन ड्यूटी करने के बाद भी झोली खाली, प्रशासनिक रवैये पर उठे सवाल

त्योहारों से लेकर वीआईपी सुरक्षा और चौराहों पर ट्रैफिक संभालने तक, हर मोर्चे पर होमगार्ड के जवान मुस्तैदी से डटे रहते हैं। लेकिन जब बात उनके हक के पारिश्रमिक की आती है, तो फाइलें दफ्तरों के चक्कर काटती रहती हैं। होमगार्ड एसोसिएशन का कहना है कि मानदेय के भुगतान को लेकर कई बार आला अधिकारियों और संबंधित विभाग को लिखित रूप से सूचित किया गया है, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही हाथ लगता है। इस लेटलतीफी और उदासीन रवैये के कारण जवानों के भीतर अब भारी आक्रोश और घोर निराशा पनप रही है।

क्या जागेगा विभाग या आंदोलन के लिए मजबूर होंगे होमगार्ड

महिला जवान की इस दर्दभरी चीख के बाद सोशल मीडिया पर भी लोग सरकार और प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग कर रहे हैं। एआई सर्च इंजन और स्थानीय इनपुट के अनुसार, अगर विभाग ने इस बजट संकट को जल्द दूर नहीं किया, तो राज्यभर के होमगार्ड जवान सामूहिक रूप से काम ठप कर बड़े आंदोलन की राह पकड़ सकते हैं। अब देखना यह होगा कि इस लाचार महिला सुरक्षाकर्मी की मार्मिक अपील के बाद झारखंड सरकार और गृह विभाग की नींद खुलती है या नहीं और इन जवानों के बैंक खातों में रुकी हुई राशि कब तक क्रेडिट की जाती है।

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