कोयल नदी में स्नान करने उतरे चार युवकों की डूबने से दर्दनाक मौत, पांचवां अभी भी लापता
झारखंड के पलामू जिले से इस वक्त एक बेहद दुखद, दिल को झकझोर देने वाली और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी है। राज्य भर में जहां एक ओर भाई-बहन के अटूट प्रेम और प्रकृति के पर्व कर्मा पूजा (Karma Puja) का पावन त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा था और लोग पारंपरिक गीतों व झूमर की धुनों पर झूम रहे थे, वहीं पलामू के एक गांव में यह महापर्व खुशियों की जगह जिंदगी का सबसे बड़ा मातम लेकर आया। कर्मा पूजा के पावन अवसर पर विसर्जन और पारंपरिक अनुष्ठानों के बाद कोयल नदी (Koyel River) में स्नान करने उतरे पांच युवक गहरे पानी के तेज बहाव की चपेट में आ गए। इस भीषण हादसे में चार युवकों की पानी में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि पांचवें युवक का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है और उसकी तलाश में गोताखोरों की टीम लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है। इस हृदयविदारक घटना के बाद से मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में चूल्हे तक नहीं जले हैं। इस लेख के माध्यम से हम इस पूरी दुखद घटना के हर एक पहलू और प्रशासनिक राहत कार्यों की विस्तार से चर्चा करेंगे।
कर्मा पूजा के जश्न के दौरान कोयल नदी में कैसे हुआ यह भीषण हादसा?
झारखंड और बिहार के ग्रामीण अंचलों में कर्मा पूजा का त्योहार बहुत ही धूमधाम और सांस्कृतिक उत्साह के साथ मनाया जाता है। युवा वर्ग और बच्चे इस पर्व के पारंपरिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। पलामू जिले के संबंधित क्षेत्र में भी कर्मा पूजा की धूम थी और स्थानीय युवा पारंपरिक गीतों के साथ कर्मा डाली के विसर्जन या अन्य अनुष्ठानों के लिए नदी के घाट पर पहुंचे थे। अनुष्ठान संपन्न होने के बाद जोश में आकर कुछ युवक गर्मी और थकान मिटाने के लिए कोयल नदी के ठंडे पानी में स्नान करने उतर गए। उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि नदी के इस हिस्से में पानी का बहाव कितना तेज है और अंदर गहराई कितनी ज्यादा है। जैसे ही वे गहरे पानी में उतरे, वे संभल नहीं पाए और एक-एक करके तेज बहाव की आगोश में समाते चले गए। उनके साथियों और तट पर मौजूद लोगों ने जब उन्हें डूबते हुए देखा, तो चीख-पुकार मच गई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
चार युवकों के शव हुए बरामद, पांचवें की तलाश में गोताखोरों का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस, जिला प्रशासन के आला अधिकारी और आपदा प्रबंधन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं। स्थानीय ग्रामीणों और गोताखोरों की मदद से नदी में तुरंत खोजबीन शुरू की गई। कड़ी मशक्कत और घंटों के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद नदी के अलग-अलग हिस्सों से चार युवकों के शवों को बाहर निकाल लिया गया, जिन्हें देखकर मौके पर मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। हालांकि, पांचवें युवक का अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है और प्रशासन की ओर से नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स या स्थानीय बचाव टीमों को लगाकर लगातार उसकी तलाश की जा रही है। नदी के पानी का गंदलापन और तेज बहाव बचाव कार्य में सबसे बड़ी बाधा बन रहा है, फिर भी प्रशासन यह उम्मीद कर रहा है कि जल्द ही लापता युवक का भी पता लगा लिया जाएगा। मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
एक झटके में उजड़ गईं कई मांगें और परिवारों के बुझ गए इकलौते चिराग
इस दर्दनाक हादसे ने कई हंसते-खेलते परिवारों को जिंदगी भर का कभी न भरने वाला जख्म दे दिया है। जिन घरों में कुछ घंटे पहले तक लोकगीतों की गूंज और कर्मा पूजा के पकवानों की खुशबू महक रही थी, वहां अब चीख-पुकार और मातम का सन्नाटा पसरा हुआ है। जान गंवाने वाले और लापता युवक अपने-अपने घरों के होनहार और मिलनसार सदस्य थे, जिन पर पूरे परिवार की आर्थिक और सामाजिक उम्मीदें टिकी हुई थीं। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में कभी ऐसा काला दिन नहीं देखा था जब पावन पर्व के दिन इतनी बड़ी त्रासदी पूरे गांव पर एक साथ टूट पड़ी हो। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी है और सरकार की ओर से हरसंभव मुआवजे तथा आर्थिक सहायता दिलाने का भरोसा दिलाया है।
त्योहारों के दौरान नदी-घाटों पर सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही के बड़े सवाल
इस हृदयविदारक घटना के बाद एक बार फिर से यह सवाल बहुत जोरशोर से उठने लगा है कि जब ऐसे बड़े और पारंपरिक त्योहारों के दौरान हजारों की संख्या में ग्रामीण और युवा नदी-तालाबों के किनारे पहुंचते हैं, तो वहां जिला प्रशासन या स्थानीय पंचायतों की तरफ से पुख्ता सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए जाते हैं? कोयल नदी के उस घाट पर न तो बैरिकेडिंग की कोई व्यवस्था थी और न ही किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए गोताखोर या पुलिस बल की तैनाती की गई थी। यदि समय रहते सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए होते, तो शायद इन मासूम जिंदगियों को बचाया जा सकता था। इस हादसे ने प्रशासन और आम जनता दोनों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जल स्रोतों के पास उत्सव मनाते समय अत्यधिक सावधानी बरतना कितना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।