राज्यसभा चुनाव के बाद झारखंड महागठबंधन में भयंकर रार! कांग्रेस की तीखी बयानबाजी पर भड़की आरजेडी
झारखंड की सियासत और सत्ताधारी महागठबंधन के भीतर से इस वक्त की बेहद बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है। राज्य में हाल ही में संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद गठबंधन के दो प्रमुख घटक दलों—कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD)—के बीच दरार अब पूरी तरह से जगजाहिर हो गई है। चुनाव खत्म होते ही दोनों पार्टियों के शीर्ष नेताओं के बीच जुबानी जंग और तीखी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस की ओर से गठबंधन धर्म की अनदेखी और भितरघात के लगाए गए आरोपों पर अब आरजेडी ने बेहद आक्रामक अंदाज में पलटवार किया है। आरजेडी ने साफ लफ्जों में कांग्रेस को आईना दिखाते हुए कहा है कि वे अपनी नाकामियों का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने के बजाय पहले अपने अंदर झांक कर देखें। इस सियासी घमासान से झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार के भीतर भी खलबली मच गई है।
जानिए क्या हैं कांग्रेस के आरोप जिसने सुलगते कोयले में घी का काम किया
दरअसल, राज्यसभा चुनाव के सियासी समीकरणों और वोटिंग के बाद कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर की थी। कांग्रेस का आरोप था कि गठबंधन के कुछ विधायकों और सहयोगी दलों ने तय रणनीति के मुताबिक पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में ईमानदारी से मतदान नहीं किया, जिससे मनमुताबिक नतीजे हासिल नहीं हो सके। कांग्रेस ने दबी जुबान में आरजेडी और अन्य सहयोगियों पर क्रॉस वोटिंग या सहयोग न करने का ठीकरा फोड़ा था। कांग्रेस की इस सार्वजनिक बयानबाजी और गठबंधन सहयोगियों पर उंगली उठाने के रवैये ने आरजेडी के शीर्ष नेतृत्व को पूरी तरह से नाराज कर दिया, जिसके बाद यह विवाद अब खुलकर चौक-चौराहों पर आ गया है।
आरजेडी का तीखा हमला: अपनी गुटबाजी और अंतर्कलह को संभाले कांग्रेस
कांग्रेस के इन आरोपों पर राष्ट्रीय जनता दल के झारखंड प्रदेश नेतृत्व ने कड़ा ऐतराज जताते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दो टूक जवाब दिया है। आरजेडी प्रवक्ताओं और दिग्गजों ने कहा कि आरजेडी हमेशा से गठबंधन धर्म का पूरी निष्ठा के साथ पालन करती आई है और हमारे सभी विधायकों ने पूरी एकजुटता दिखाई है। कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए आरजेडी ने कहा कि कांग्रेस की आदत हो गई है कि जब भी वे अपनी कमजोरियों या अंतर्कलह के कारण कोई चुनाव हारते हैं या कमजोर प्रदर्शन करते हैं, तो वे सहयोगियों को दोष देने लगते हैं। आरजेडी ने सलाह दी कि कांग्रेस आलाकमान को झारखंड में अपने विधायकों के असंतोष और आंतरिक गुटबाजी की समीक्षा करनी चाहिए, न कि आरजेडी जैसी वफादार सहयोगी पार्टी पर बेबुनियाद आरोप लगाने चाहिए।
एआई सर्च और झारखंड की राजनीति पर इस कलह का भौगोलिक असर
आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और पॉलिटिकल एआई सर्च के ताजा आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, रांची, धनबाद, जमशेदपुर और दुमका जैसे झारखंड के प्रमुख राजनीतिक केंद्रों में इस खबर को लेकर इंटरनेट सर्च काफी तेजी से बढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव के बाद पैदा हुई यह रार केवल बयानों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सीटों के तालमेल और गठबंधन के भविष्य पर भी इसका गहरा असर पड़ सकता है। जेएमएम (JMM) फिलहाल इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और दोनों दलों के बीच बीच-बचाव की कोशिशों में जुटी है, लेकिन आरजेडी और कांग्रेस के तल्ख तेवरों को देखकर लगता है कि यह सियासी तूफान इतनी आसानी से थमने वाला नहीं है।