गुलेल से सटीक निशाना साध गिराया ड्रोन, NTPC के 3 अफसरों को 7 घंटे बनाया बंधक
झारखंड के लातेहार जिले से एक हैरान कर देने वाली और अनोखी घटना सामने आई है, जहां ग्रामीण इलाकों में अपनी जमीन और अधिकारों की रक्षा को लेकर ग्रामीणों के विरोध का अजब रूप देखने को मिला। जिले के बालूमठ थाना क्षेत्र के गेरेनजा-हराफू गांव में कोयला खनन परियोजना के लिए जमीन का सर्वे करने पहुंची नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (NTPC) की टीम को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। बिना ग्राम सभा की पूर्व अनुमति के शुरू किए गए ड्रोन सर्वेक्षण से नाराज होकर ग्रामीणों ने अपने पारंपरिक हथियार 'गुलेल' से सटीक निशाना साधते हुए आसमान में उड़ रहे अत्याधुनिक ड्रोन को पल भर में नीचे गिरा दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने गुस्से में आकर एनटीपीसी के महाप्रबंधक (GM) और दो सहायक महाप्रबंधकों (AGM) सहित कुल छह से सात अधिकारियों और कर्मियों को लगभग सात घंटे तक बंधक बनाए रखा। इस घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में पुलिस प्रशासन को राहत कार्य के लिए उतरना पड़ा।
#1 बिना ग्राम सभा की अनुमति के ड्रोन सर्वे से भड़के ग्रामीण, गुलेल से साधा निशाना
यह पूरी घटना बालूमठ थाना क्षेत्र के गेरेनजा-हराफू गांव में सुबह के समय घटित हुई। एनटीपीसी की एक टीम आवंटित कोयला ब्लॉक के लिए भूमि सर्वेक्षण और डेटा मैपिंग के उद्देश्य से गांव में पहुंची थी। टीम ने जैसे ही आधुनिक कैमरों से लैस ड्रोन को हवा में उड़ाकर सर्वे शुरू किया, गांव के लोग एकत्र हो गए और सर्वे का जोरदार विरोध करने लगे। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप था कि कनाडाई या भारतीय कानूनों और पेसा अधिनियम के तहत किसी भी प्रकार का भूमि अधिग्रहण या भौगोलिक सर्वे करने से पहले स्थानीय ग्राम सभा की सहमति लेना अनिवार्य है। लेकिन बिना किसी पूर्व सूचना या बैठक के गांव के ऊपर ड्रोन उड़ता देख ग्रामीण भड़क उठे और उन्होंने पारंपरिक गुलेल से पत्थर मारकर हाई-टेक ड्रोन को तुरंत ध्वस्त कर नीचे गिरा दिया।
#1 एनटीपीसी महाप्रबंधक की गाड़ी घेरी, अधिकारियों को 7 घंटे रखा बंधक
ड्रोन गिराने के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को घेर लिया। एनटीपीसी के महाप्रबंधक आनंद अग्रवाल, उनके दो सहायक महाप्रबंधक और ड्रोन ऑपरेटरों को ग्रामीणों ने अपनी कस्टडी में ले लिया और महाप्रबंधक की गाड़ी के आगे घेरा बनाकर बैठ गए। सुबह करीब 9 बजे से शुरू हुआ यह बंधक संकट दोपहर बाद तक जारी रहा। ग्रामीणों की मांग थी कि जब तक कंपनी का प्रबंधन लिखित रूप से यह नहीं देता कि भविष्य में बिना ग्राम सभा की सहमति के कोई काम या सर्वे नहीं होगा, तब तक किसी भी अधिकारी को जाने नहीं दिया जाएगा। घटना की खबर मिलते ही बालूमठ थाना प्रभारी अनुभव सिन्हा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने-बुझाने का प्रयास करने लगे।
#1 कंपनी का लिखित आश्वासन मिलने के बाद शाम 4 बजे छूटे अधिकारी
प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय पुलिस ने ग्रामीणों के साथ कई दौर की लंबी वार्ता की। ग्रामीणों की तीखी प्रतिक्रिया और अडिग रुख को देखते हुए एनटीपीसी अधिकारियों को झुकना पड़ा। आखिरकार, एनटीपीसी प्रबंधन ने ग्रामीणों को एक आधिकारिक लिखित आश्वासन सौंपा, जिसमें स्पष्ट रूप से यह कहा गया कि ग्राम सभा की पूर्वानुमति और परामर्श के बिना उस इलाके में किसी भी प्रकार का सर्वे या विकास कार्य आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। कंपनी का लिखित पत्र मिलने के बाद शाम करीब 4 बजे ग्रामीणों ने बंधक बनाए गए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सुरक्षित छोड़ दिया। पुलिस की निगरानी में टीम वहां से सुरक्षित रवाना हुई।
#1 कोयला ब्लॉक सर्वे विवाद और भूमि अधिकारों पर उठी नई बहस
लातेहार जिले के इस घटनाक्रम ने एक बार फिर झारखंड के कोयला समृद्ध क्षेत्रों में जमीन अधिग्रहण, ग्राम सभा की शक्तियों और कॉरपोरेट कंपनियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय आदिवासी व ग्रामीण समुदायों का मानना है कि उनकी सहमति के बिना किया जा रहा कोई भी सर्वे उनकी जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा पर हमला है। वहीं, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है और मामले के सभी कानूनी पहलुओं की जांच की जा रही है। फिलहाल इस अजब-गजब विरोध और गुलेल से ड्रोन गिराए जाने की घटना की चर्चा पूरे प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में जोरों पर बनी हुई है।