लेकिन शाम 6 बजते ही क्यों पसरा रहता है सन्नाटा और विरान हो जाता है पूरा परिसर, जानें इसके पीछे का रहस्य

लेकिन शाम 6 बजते ही क्यों पसरा रहता है सन्नाटा और विरान हो जाता है पूरा परिसर, जानें इसके पीछे का रहस्य

झारखंड की पावन धरती पर आस्था और अध्यात्म से जुड़े कई ऐसे प्राचीन मंदिर मौजूद हैं जो अपने अनोखे चमत्कारों और अनसुलझे रहस्यों के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। इसी कड़ी में राजधानी रांची में स्थित संकटमोचन पवनपुत्र हनुमान जी का एक ऐसा दिव्य मंदिर है, जिसकी ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है। भक्तों का अटूट विश्वास है कि इस दरबार में जो भी भक्त सच्चे मन से अपनी अर्जी लगाता है, बजरंगबली उसकी हर बिगड़ी बना देते हैं और कोई भी यहां से खाली हाथ नहीं लौटता। लेकिन इस पावन धाम की एक ऐसी बेहद अजीब और हैरान कर देने वाली बात भी है, जो लोगों को सोच में डाल देती है। हर दिन भक्तों की भारी भीड़ और जयकारों से गूंजने वाला यह अनोखा मंदिर शाम के ठीक 6 बजते ही पूरी तरह से सुनसान और विरान हो जाता है। सूर्यास्त के बाद यहां का नजारा देखकर हर कोई हैरान रह जाता है।

हर बिगड़ी बनाने वाले बजरंगबली के इस दरबार का सदियों पुराना महात्म्य

रांची के इस विख्यात हनुमान मंदिर का इतिहास और इसका महात्म्य बेहद गौरवशाली माना जाता है। स्थानीय निवासियों और मंदिर के बुजुर्ग पुजारियों के अनुसार, यहां स्थापित बजरंगबली की दिव्य प्रतिमा अत्यंत प्राचीन और जाग्रत अवस्था में है। मंगलवार और शनिवार के दिन तो इस परिसर में पैर रखने तक की जगह नहीं होती है। दूर-दराज के जिलों और पड़ोसी राज्यों से भी लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर बाबा के दर पर माथा टेकने आते हैं। मंदिर परिसर में कदम रखते ही भक्तों को एक असीम शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अहसास होता है। मान्यता है कि यहां लगातार पांच मंगलवार आकर सिंदूर और चोला चढ़ाने से बड़े से बड़ा संकट भी पल भर में टल जाता है।

आखिर शाम 6 बजते ही क्यों अचानक खाली हो जाता है मंदिर परिसर

आमतौर पर देश के अधिकांश हिंदू मंदिरों में शाम के समय संध्या आरती का भव्य आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं और भजन-कीर्तन का दौर देर रात तक चलता है। लेकिन इस अनोखे हनुमान मंदिर में परंपरा और नियम बिल्कुल इसके विपरीत हैं। जैसे ही घड़ी की सुइयां शाम के 6 बजाती हैं, वैसे ही मंदिर के कपाट बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है और देखते ही देखते पूरा परिसर खाली करा लिया जाता है। 6 बजे के बाद मंदिर की चौखट के भीतर किसी भी आम इंसान या भक्त को रुकने की कड़ाई से मनाही है। आसपास के दुकानदार भी अपनी दुकानें समेट लेते हैं और चारों तरफ एक रहस्यमयी सन्नाटा पसर जाता है।

क्या है शाम को विरान होने के पीछे की असली वजह और पौराणिक मान्यताएं

इस अनूठी और कड़क परंपरा के पीछे कई तरह की स्थानीय मान्यताएं और पौराणिक कहानियां प्रचलित हैं। मुख्य मान्यता के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि शाम 6 बजे के बाद इस स्थान पर अदृश्य शक्तियां और देवगण स्वयं हनुमान जी की सेवा और आराधना करने के लिए धरती पर उतरते हैं। इस अलौकिक प्रक्रिया में किसी भी इंसान की उपस्थिति से विघ्न न पड़े, इसीलिए सदियों से इस नियम का कड़ाई से पालन किया जा रहा है। एक और कहानी यह भी कही जाती है कि इस मंदिर की भौगोलिक स्थिति और प्राचीन काल में आस-पास घने जंगलों की मौजूदगी के कारण सुरक्षा के लिहाज से सूर्यास्त के बाद यहां गतिविधियां बंद कर दी जाती थीं, जो समय के साथ एक अटूट धार्मिक परंपरा का रूप ले चुकी हैं।

नई पीढ़ी और विज्ञान के लिए आज भी कौतूहल का विषय है यह मंदिर

आज के इस आधुनिक और वैज्ञानिक युग में जहां हर चीज के पीछे तर्क तलाशा जाता है, वहीं रांची के इस मंदिर की यह रहस्यमयी परंपरा नई पीढ़ी के युवाओं और शोधकर्ताओं के लिए एक बड़ा कौतूहल का विषय बनी हुई है। कई लोगों ने इस परंपरा के पीछे छिपे वैज्ञानिक या व्यावहारिक कारणों को जानने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय लोगों की गहरी आस्था और सदियों पुराने नियमों के आगे हमेशा आस्था की ही जीत हुई है। आज भी रांची आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु इस मंदिर के दर्शन करना और शाम के समय इसके विरान होने के अद्भुत और अलौकिक नजारे का साक्षी बनना बिल्कुल नहीं भूलते।

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