रामगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र में फिर बड़ा हादसा: फर्नेस फटने से मचा हड़कंप
झारखंड के औद्योगिक हब कहे जाने वाले रामगढ़ जिले से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। रामगढ़ के एक प्रमुख स्टील प्लांट में अचानक फर्नेस (लोहा पिघलाने वाली भट्टी) में भीषण ब्लास्ट हो गया। इस दर्दनाक हादसे में काम कर रहे 4 मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिनमें से एक मजदूर की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। घटना के तुरंत बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया और अफरा-तफरी के बीच सहकर्मियों तथा प्रबंधन द्वारा आनन-फानन में सभी घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया।
स्थानीय प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। रामगढ़ के स्टील और स्पंज आयरन प्लांटों में बार-बार हो रहे इस तरह के हादसों ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा मानकों और मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। एक रिपोर्टर के रूप में जब हम जमीनी हकीकत को देखते हैं, तो यह साफ हो जाता है कि सुरक्षा उपकरणों की अनदेखी किस प्रकार गरीब मजदूरों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है।
धमाके के साथ उबला पिघला लोहा: खौफनाक मंजर बयां कर रहे चश्मदीद
प्रत्यक्षदर्शियों और साथ में काम कर रहे कर्मचारियों के अनुसार, हादसा उस समय हुआ जब भट्टी में लोहे को पिघलाने की प्रक्रिया चल रही थी। अचानक एक जोरदार धमाका हुआ और भट्टी के अंदर से खौफनाक तरीके से पिघला हुआ गर्म लोहा (Melted Iron) छिटककर बाहर काम कर रहे मजदूरों पर आ गिरा। धमाका इतना तेज था कि कुछ ही सेकंड में पूरी शेड में धुआं और आग की लपटें फैल गईं।
आग की चपेट में आने से चार मजदूर बुरी तरह झुलस गए। सहकर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर किसी तरह आग पर काबू पाया और घायलों को बाहर निकाला। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने एक मजदूर की गंभीर हालत को देखते हुए उसे बेहतर इलाज और स्किन ग्राफ्टिंग के लिए रांची के रिम्स (RIMS) या उच्च चिकित्सा केंद्र में रेफर कर दिया है।
रामगढ़ के स्टील प्लांटों में पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे: सुरक्षा मानकों की खुली पोल
रामगढ़ जिले के कुजू, सिरका और अरगडा औद्योगिक गलियारों में स्थित स्टील और स्पंज आयरन फैक्टरियों में फर्नेस ब्लास्ट की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी तकनीकी खराबी, गैस रिसाव और ओवरहीटिंग के कारण कई मजदूर अपनी जान गंवा चुके हैं या पूरी जिंदगी के लिए दिव्यांग हो चुके हैं।
स्थानीय मजदूर संगठनों और पीड़ित परिवारों ने फैक्टरी मालिकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फैक्टरियों में न तो मजदूरों को उच्च गुणवत्ता वाले फायर-प्रूफ सूट (Fire-proof Suits), सेफ्टी हेलमेट या बूट्स दिए जाते हैं और न ही भट्टियों की समय-समय पर टेक्निकल सेफ्टी ऑडिट कराई जाती है। श्रम विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ढिलाई के कारण फैक्टरी प्रबंधन मुनाफा कमाने के चक्कर में सुरक्षा मानकों से लगातार खिलवाड़ कर रहा है।
पुलिस और श्रम विभाग की जांच शुरू: दोषियों पर कड़े एक्शन की मांग
घटना की सूचना मिलते ही रामगढ़ थाना पुलिस और जिला प्रशासन की टीम घटना स्थल पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने फैक्टरी के संबंधित हिस्से को सील कर जांच शुरू कर दी है कि क्या फर्नेस में पानी या नमी के संपर्क में आने से यह ब्लास्ट हुआ था अथवा कोई अन्य तकनीकी खराबी थी।
प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी फैक्टरी प्रबंधन के खिलाफ श्रम कानूनों और लापरवाही की धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही पीड़ित मजदूरों को फैक्टरी प्रबंधन की ओर से उचित मुआवजा और इलाज का पूरा खर्च उठाने का निर्देश जारी किया गया है।
औद्योगिक सुरक्षा और मजदूरों के अधिकारों पर उठते यक्ष प्रश्न
झारखंड का रामगढ़ जिला अपने खनिज संसाधनों और भारी उद्योगों के लिए पूरे देश में जाना जाता है, लेकिन यहाँ काम करने वाले हजारों दैनिक मजदूरों की सुरक्षा हमेशा से दांव पर रही है। इस ताजा हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब तक फैक्टरियों में नियमित सुरक्षा ऑडिट और एआई-आधारित सेंसर मॉनिटरिंग सिस्टम को अनिवार्य नहीं बनाया जाएगा, तब तक ऐसे जानलेवा हादसों को रोकना नामुमकिन होगा।
स्थानीय निवासियों और श्रमिक यूनियनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि रामगढ़ के सभी स्टील प्लांटों की गहन सुरक्षा जांच कराई जाए ताकि भविष्य में किसी अन्य मजदूर को इस तरह अपनी जान न गंवानी पड़े।