post-slider

पद्म भूषण के बाद अब 'दिशोम गुरु' शिबू सोरेन के लिए उठी भारत रत्न की मांग, झामुमो और कांग्रेस की केंद्र से बड़ी अपील

झारखंड की सियासत और देश के आदिवासी समाज के अधिकारों की लड़ाई से जुड़ी इस वक्त की एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण राजनीतिक खबर सामने आ रही है। झारखंड आंदोलन के महानायक और सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन (Shibu Soren) को हाल ही में मिले पद्म भूषण सम्मान के बाद अब उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान यानी 'भारत रत्न' देने की मांग बेहद तेज हो गई है। सत्तारूढ़ दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और उसकी सहयोगी पार्टी कांग्रेस ने सामूहिक रूप से केंद्र सरकार के समक्ष यह पुरजोर अपील रखी है कि 'दिशोम गुरु' के नाम से विख्यात शिबू सोरेन का योगदान किसी भी मायने में देश के सर्वोच्च सम्मान से कम नहीं है। एक राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो यह मांग न केवल झारखंड की क्षेत्रीय अस्मिता बल्कि देश के संपूर्ण आदिवासी गौरव से जुड़ी हुई है, जिसने आने वाले दिनों के लिए एक नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया है।

झारखंड आंदोलन के महानायक 'दिशोम गुरु' का ऐतिहासिक संघर्ष और राजनीतिक सफर

इस बड़ी मांग के पीछे छिपे ऐतिहासिक कारणों को अगर गहराई से समझें, तो शिबू सोरेन का नाम सिर्फ झारखंड की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि वे एक जीते-जागते इतिहास हैं। उन्होंने तत्कालीन अविभाजित बिहार के समय से ही महाजनी प्रथा, शोषण और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए आदिवासियों को एकजुट कर एक लंबे और कड़े आंदोलन का नेतृत्व किया था। उनके इसी समर्पण और जमीनी जुड़ाव के कारण जनता ने उन्हें 'दिशोम गुरु' (देश के गुरु) की महान उपाधि दी। अलग झारखंड राज्य के निर्माण में उनकी भूमिका सबसे अग्रगण्य रही है। वे कई बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे और वर्तमान में भी वे झारखंड की राजनीति के सबसे शीर्ष मार्गदर्शक और केंद्र बिंदु माने जाते हैं। यही वजह है कि पद्म भूषण मिलने के तुरंत बाद अब उनके समर्थक और पूरी गठबंधन सरकार उन्हें भारत रत्न के रूप में सम्मानित देखना चाहती है।

झामुमो और कांग्रेस की सामूहिक सुर: केंद्र सरकार के पाले में डाली गेंद

इस मांग को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय प्रवक्ताओं और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर केंद्र की एनडीए सरकार से इस पर तुरंत विचार करने को कहा है। गठबंधन के नेताओं का तर्क है कि शिबू सोरेन ने अपना पूरा जीवन देश के सबसे पिछड़े, शोषित और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया है। उनके इस अद्वितीय और ऐतिहासिक योगदान को देखते हुए उन्हें भारत रत्न (Bharat Ratna For Shibu Soren) से नवाजा जाना पूरे देश के जनजातीय समाज का वास्तविक सम्मान होगा। राजनीतिक रणनीतिकारों का मानना है कि इस मांग के जरिए जेएमएम और कांग्रेस ने सीधे तौर पर केंद्र सरकार के पाले में गेंद डाल दी है, जिससे आने वाले चुनावों से पहले आदिवासी कार्ड और क्षेत्रीय अस्मिता की राजनीति एक नए मुकाम पर पहुंच सकती है।

झारखंड की भौगोलिक और स्थानीय अस्मिता से जुड़ा है यह बेहद संवेदनशील मुद्दा

भौगोलिक और स्थानीय (Local Optimization) दृष्टिकोण से देखा जाए तो शिबू सोरेन की जड़ें झारखंड के संताल परगना, छोटानागपुर और सुदूर ग्रामीण इलाकों के कण-कण से जुड़ी हुई हैं। झारखंड के ग्रामीण अंचलों में आज भी लोग उन्हें भगवान की तरह पूजते हैं। ऐसे में झामुमो और कांग्रेस द्वारा उठाई गई यह मांग सीधे तौर पर झारखंड के ३ करोड़ से अधिक नागरिकों की भावनाओं को छूती है। स्थानीय नेताओं का कहना है कि यदि केंद्र सरकार इस मांग पर सकारात्मक रुख अपनाती है, तो यह देश की मुख्यधारा में आदिवासियों की भागीदारी का सबसे बड़ा प्रतीक बनेगा। इस मांग को लेकर राज्य के विभिन्न जिलों, जैसे रांची, दुमका, जमशेदपुर और धनबाद में कार्यकर्ताओं के बीच भारी उत्साह देखा जा रहा है।

आगामी राजनीतिक समीकरणों और एआई सर्च के नजरिए से क्यों महत्वपूर्ण है यह मांग

आधुनिक जेनेरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI सर्च) और राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से यह मुद्दा बेहद ट्रेंडिंग होने जा रहा है। शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की यह मांग केवल एक सम्मान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक मायने भी हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच अपनी पकड़ और मजबूत करने की रणनीति बना रही है। उधर, विपक्षी दलों के लिए भी इस आदिवासी गौरव से जुड़ी मांग का सीधे तौर पर विरोध करना नामुमकिन जैसा होगा। अब देखना यह होगा कि दिल्ली के सियासी गलियारों से इस बड़ी मांग पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है और क्या बप्पा की कृपा से दिशोम गुरु का नाम देश के सर्वोच्च सम्मान की सूची में दर्ज हो पाता है।

Tags:

Latest Posts