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April 05 2026 07:14 am

Jharkhand Politics : पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के घर पर चला बुलडोजर, हजारीबाग में भारी सुरक्षा के बीच जमींदोज हुआ मकान

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News India Live, Digital Desk: हजारीबाग जिले के केरेडारी प्रखंड के जोरडाग गांव में गुरुवार को हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। जिला प्रशासन और एनटीपीसी के अधिकारियों ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के घर को तीन पोकलेन मशीनों की मदद से गिरा दिया। यह कार्रवाई चट्टी बरियातू कोयला खनन परियोजना (Chatti Bariatu Coal Mining Project) के विस्तार के लिए की गई है।

1. विवाद की मुख्य वजह (Land & Compensation Dispute)

प्रशासन और एनटीपीसी के अनुसार, यह कार्रवाई नियमों के तहत की गई है:

अधिग्रहण: जिस जमीन पर घर बना था, उसे कोयला खनन के लिए पहले ही अधिग्रहित किया जा चुका था।

मुआवजा: एनटीपीसी का दावा है कि जमीन का मुआवजा तय हो चुका था। जब योगेंद्र साव ने इसे लेने से इनकार कर दिया, तो 1.97 करोड़ रुपये की राशि ट्रिब्यूनल कोर्ट में जमा करा दी गई।

अतिक्रमण का आरोप: प्रशासन का कहना है कि खनन कार्य में बाधा आ रही थी और कई बार नोटिस देने के बावजूद घर खाली नहीं किया गया था।

2. योगेंद्र साव और पत्नी का विरोध

ध्वस्तीकरण से पहले योगेंद्र साव और उनकी पत्नी (पूर्व विधायक निर्मला देवी) पिछले कई दिनों से अपने घर के बाहर धरने पर बैठे थे।

मांग: उनकी मांग थी कि जमीन का मुआवजा वर्तमान दरों के हिसाब से बढ़ाया जाए और विस्थापितों का उचित पुनर्वास हो।

टकराव: पिछले कुछ दिनों में प्रशासन और पूर्व मंत्री के समर्थकों के बीच कई बार झड़पें भी हुई थीं, जिसके बाद गुरुवार को भारी सुरक्षा घेरे में यह कार्रवाई की गई।

3. अंबा प्रसाद की तीखी प्रतिक्रिया

योगेंद्र साव की बेटी और बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने इस कार्रवाई को 'अन्यायपूर्ण' और 'अवैध' बताया है:

अदालती मामला: अंबा प्रसाद का दावा है कि मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन (Sub-judice) था, फिर भी प्रशासन ने जल्दबाजी में घर गिरा दिया।

कानूनी कार्रवाई: उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे इस 'अत्याचार' के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएंगी।

4. राजनीतिक सरगर्मी

हजारीबाग में हुई इस कार्रवाई ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। विपक्षी दल इसे 'सत्ता का दुरुपयोग' बता रहे हैं, जबकि प्रशासन इसे विकास कार्यों में आ रही बाधा को दूर करने की एक कानूनी प्रक्रिया करार दे रहा है।