Jharkhand Liquor Scam : शराब घोटाले में पटना के कारोबारी का फर्जीवाड़ा उजागर, 5.35 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी का खेल; विनय सिंह को SC से राहत

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News India Live, Digital Desk: झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले (Liquor Scam) की जांच कर रही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक बड़ा खुलासा किया है। इस घोटाले के तार अब बिहार की राजधानी पटना से जुड़ गए हैं। एसीबी की जांच में सामने आया है कि पटना की एक कंपनी के प्रबंध निदेशक ने फर्जी बैंक गारंटी के जरिए सरकार को करोड़ों का चूना लगाने की कोशिश की। वहीं, इसी मामले से जुड़े अन्य आरोपी कारोबारी विनय सिंह के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत की खबर आई है।

5.35 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी: ऐसे रचा गया 'मायाजाल'

एसीबी की जांच के अनुसार, पटना की कंपनी एडीएसईपी मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर के एमडी श्यामजी शरण ने इस पूरे खेल में मुख्य भूमिका निभाई।

सीक्रेट एमओयू: श्यामजी शरण की कंपनी ने विजन हॉस्पिटैलिटी (मानव संसाधन प्रदाता कंपनी) के साथ एक गुप्त समझौता किया था।

बैंक का फर्जीवाड़ा: विजन हॉस्पिटैलिटी ने पहले 'बैंक ऑफ बड़ौदा' की वैध गारंटी दी थी, जिसे बाद में साजिश के तहत पंजाब एंड सिंध बैंक (नई दिल्ली) की ₹5,35,35,241 की फर्जी बैंक गारंटी से बदल दिया गया।

जांच में खुली पोल: जब एसीबी की टीम ने बैंक जाकर सत्यापन किया, तो बैंक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी ऐसी कोई गारंटी जारी ही नहीं की। बैंक के लेटरहेड और मुहर तक फर्जी पाए गए हैं।

कारोबारी विनय सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

शराब और जमीन घोटाले के आरोपी और नेक्सजेन मोटर्स के मालिक विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह को देश की शीर्ष अदालत (Supreme Court) से राहत मिली है:

नियमित जमानत: सुप्रीम कोर्ट ने विनय सिंह को दो अलग-अलग मामलों में नियमित जमानत दे दी है।

दंडात्मक कार्रवाई पर रोक: स्निग्धा सिंह को तीन मामलों में किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान की गई है।

अदालत की चिंता: सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर हैरानी और चिंता जताई कि जमानत मिलने के बावजूद आरोपी के खिलाफ लगातार नए मामले दर्ज किए जा रहे हैं।

IAS विनय चौबे और सिंडिकेट पर कसता शिकंजा

एसीबी की चार्जशीट और अब तक की जांच में यह साफ हो चुका है कि यह घोटाला केवल कुछ कारोबारियों तक सीमित नहीं था। निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे और छत्तीसगढ़ के सिंडिकेट ने मिलकर ऐसी नीतियां बनाईं जिससे खास एजेंसियों को फायदा पहुँचाया जा सके।

38 करोड़ का शुरुआती आंकड़ा: एसीबी ने अब तक 38 करोड़ के घोटाले की पुष्टि की है, लेकिन ईडी (ED) की एंट्री के बाद यह आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है।