Jharkhand Liquor Scam : तत्कालीन उत्पाद आयुक्त फैज अहमद से ACB ने की घंटों पूछताछ, घेरे में कई बड़े अधिकारी
News India Live, Digital Desk: झारखंड के चर्चित शराब घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसकी आंच कई बड़े अधिकारियों तक पहुंच रही है. इसी सिलसिले में सोमवार को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने मामले के एक अहम किरदार, तत्कालीन उत्पाद आयुक्त और वर्तमान में रामगढ़ के डीसी (उपायुक्त) फैज अक अहमद मुमताज से लंबी पूछताछ की. एसीबी ने उनसे नई शराब नीति में हुई धांधली और सरकार को हुए करोड़ों के राजस्व नुकसान से जुड़े कई कड़े सवाल पूछे.
फर्जी बैंक गारंटी और एजेंसियों की भूमिका पर अटकी सुई
सूत्रों के अनुसार, एसीबी की पूछताछ का मुख्य केंद्र दो प्लेसमेंट एजेंसियों द्वारा जमा की गई फर्जी बैंक गारंटी का मामला थाइन एजेंसियों को राज्य में शराब दुकानों के संचालन का जिम्मा दिया गया था. अधिकारियों ने फैज अहमद से पूछा कि जब ये एजेंसियां फर्जी बैंक गारंटी जमा कर रही थीं और सरकारी खजाने में पैसा नहीं डाल रही थीं, तो उत्पाद आयुक्त के तौर पर उन्होंने समय रहते इन पर कार्रवाई क्यों नहीं की?
एसीबी ने यह भी जानने की कोशिश की कि क्या इन गंभीर चूकों की जानकारी उन्होंने लिखित या मौखिक रूप से अपने से ऊपर के अधिकारियों, जैसे तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे, को दी थीआपको बता दें कि इस घोटाले में दो एजेंसियों- मेसर्स विजन हॉस्पिटैलिटी सर्विसेज और मेसर्स मार्शन इनोवेटिव सिक्यूरिटी सर्विसेज पर फर्जी बैंक गारंटी के सहारे सरकार को करोड़ों का चूना लगाने का आरोप हैजांच में यह बात सामने आई थी कि इन एजेंसियों ने जो बैंक गारंटी दी थी, वो बैंकों ने कभी जारी ही नहीं की थी घोटाले में अब तक कौन-कौन आया लपेटे में?
फैज अक अहमद इस मामले में पूछताछ का सामना करने वाले कोई पहले बड़े अधिकारी नहीं हैं. उनसे पहले तत्कालीन उत्पाद सचिव और मुख्यमंत्री के सचिव रहे आईएएस विनय कुमार चौबे को तो एसीबी गिरफ्तार भी कर चुकी है इनके अलावा जमशेदपुर के डीसी कर्ण सत्यार्थी और आईएएस अधिकारी मुकेश कुमार और मनोज कुमार से भी पूछताछ हो चुकी है.
यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से भी जुड़ा है, जहां एक सिंडिकेट पर झारखंड में अधिकारियों के साथ मिलकर नई उत्पाद नीति को प्रभावित करने और अवैध कमाई करने का आरोप है आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत के कारण सरकारी खजाने को करीब 38.44 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. हालांकि, एसीबी ने फैज अहमद से हुई पूछताछ पर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है, लेकिन माना जा रहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो उन्हें दोबारा बुलाया जा सकता है. इस हाई-प्रोफाइल केस में कई और बड़े नामों के सामने आने की पूरी संभावना है.