Jharkhand crime : सत्ता और पैसे का खेल? नीरज सिंह हत्याकांड के फैसले ने उठाए गंभीर सवाल
News India Live, Digital Desk: धनबाद के सबसे चर्चित नीरज सिंह हत्याकांड में जब अदालत ने पूर्व विधायक संजीव सिंह समेत सभी 10 आरोपियों को बरी कर दिया, तो इस फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए। इन्हीं सवालों के बीच एक ऐसी आवाज गूंजी जिसने सबका दिल दहला दिया। यह आवाज नीरज सिंह के साथ मारे गए उनके सहयोगी अशोक यादव के बेटे शुभम की थी। भरी हुई आंखों से शुभम ने बस एक ही सवाल पूछा, “अगर ये सभी लोग निर्दोष हैं, तो फिर मेरे पापा की हत्या किसने की?”
21 मार्च 2017 की शाम को धनबाद में पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह समेत चार लोगों की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे कोयलांचल को हिलाकर रख दिया था। मामले की जांच हुई और नीरज सिंह के चचेरे भाई और झरिया से तत्कालीन विधायक संजीव सिंह समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया। सालों तक केस चला, सुनवाई हुई, लेकिन आठ साल लंबे इंतजार के बाद जब फैसला आया तो सबूतों के अभाव में सभी आरोपी बरी हो गए।
इस फैसले ने पीड़ित परिवारों को निराश कर दिया है। अशोक यादव के बेटे शुभम ने कहा कि सत्ता और पैसे के आगे हम गरीबों की कोई नहीं सुनता। उन्होंने कहा, "दो बड़े लोगों की लड़ाई में हम पिस गए। पिछले आठ साल से हम भाई जैसे-तैसे अपनी माँ को संभाल रहे हैं। यह शहर अब काटने को दौड़ता है। शुभम ने बताया कि उन्होंने अपनी माँ को अभी तक कोर्ट के फैसले के बारे में नहीं बताया है क्योंकि उन्हें डर है कि वह यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाएंगी।
सिर्फ अशोक यादव का परिवार ही नहीं, बल्कि नीरज सिंह के ड्राइवर रहे घल्टू महतो की पत्नी मीना देवी ने भी इस फैसले पर दुख जताया है। नम आंखों से उन्होंने कहा, “हमें कोर्ट से इंसाफ नहीं मिला। जिन्होंने हमारा घर उजाड़ा, उन्हें सजा मिलनी चाहिए थी।” पति की मौत के बाद से ही मीना देवी की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और वे किसी तरह अपना परिवार चला रही हैं।
अदालत के इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि अगर सभी आरोपी बेकसूर हैं तो आखिर उन चार लोगों का कातिल कौन है? यह सवाल आज भी धनबाद की फिजाओं में गूंज रहा है और पीड़ित परिवार इंसाफ की एक धुंधली सी उम्मीद लगाए बैठे हैं।