Jharkhand Civic Elections : अब इस साल उम्मीद छोड़ दीजिए आयोग ने कहा मार्च 2026 में ही हो पाएंगे चुनाव
News India Live, Digital Desk : झारखंड के शहरों में रहने वाले लोग पिछले कई सालों से एक ही सवाल पूछ रहे हैं"भाई, हमारे शहर की सरकार (नगर निकाय) का चुनाव कब होगा?" नाली जाम हो या सड़क ख़राब, अभी लोगों को अपनी फरियाद लेकर अफसरों के पास ही दौड़ना पड़ता है क्योंकि न कोई मेयर है और न ही कोई वार्ड पार्षद।
अगर आप उम्मीद लगाए बैठे थे कि 2025 खत्म होते-होते चुनाव हो जाएंगे, तो आपके लिए एक थोड़ी निराश करने वाली खबर है। राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) ने साफ़ कर दिया है कि अभी चुनाव संभव नहीं हैं। मामला हाईकोर्ट में है और आयोग ने वहां नई तारीख बता दी है।
आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि पेंच कहां फंसा है और अब आपको वोट डालने का मौका कब मिलेगा।
मार्च 2026 की डेडलाइन (The New Date)
झारखंड हाईकोर्ट में निकाय चुनाव में हो रही देरी को लेकर सुनवाई चल रही थी। अदालत ने आयोग से सीधा सवाल पूछा था कि आखिर चुनाव कब कराएंगे?
जवाब में राज्य निर्वाचन आयोग ने जो हलफनामा (Affidavit) दिया है, उसके मुताबिक़, चुनाव कराने के लिए उन्हें मार्च 2026 तक का समय चाहिए।
यानी, साल 2025 के बचे हुए महीने और 2026 की शुरुआत तक बिना चुने हुए प्रतिनिधियों के ही काम चलेगा।
आखिर इतनी देरी क्यों हो रही है? (Reason for Delay)
आप सोच रहे होंगे कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव तो टाइम पर हो जाते हैं, फिर इसमें क्या दिक्कत है?
दरअसल, पेंच तकनीकी है। आयोग का कहना है कि:
- आरक्षण रोस्टर (Reservation Roster): कई जगह ओबीसी (OBC) और अन्य वर्गों के आरक्षण को लेकर पेंच फंसा हुआ था, जिसे ट्रिपल टेस्ट के जरिए सुलझाया जाना है।
- वोटर लिस्ट और परिसीमन: चुनाव कराने से पहले वार्डों का गठन और मतदाता सूची को अपडेट करने की लंबी प्रक्रिया होती है, जिसमें समय लगता है। आयोग का कहना है कि यह तैयारी पूरी करने में उन्हें अभी वक्त लगेगा।
जनता पर क्या असर पड़ रहा है?
इसका सीधा असर आपके मोहल्ले और शहर के विकास पर पड़ रहा है।
- सुनवाई नहीं: चुने हुए प्रतिनिधि (मेयर/अध्यक्ष) न होने से जनता की सीधी पकड़ सिस्टम पर कम हो गई है।
- फंड की दिक्कत: कई बार केंद्र से मिलने वाला ग्रांट भी चुनी हुई बॉडी न होने के कारण अटक जाता है।
रांची, धनबाद, जमशेदपुर समेत पूरे राज्य के नगर निगम और नगर परिषदों में फिलहाल प्रशासनिक अधिकारी (Administrators) ही काम देख रहे हैं।
हाईकोर्ट की सख्ती
हाईकोर्ट इस देरी से बहुत खुश नहीं है। अदालत ने आयोग और सरकार को निर्देश दिया है कि जो तारीख बताई गई है, उस पर हर हाल में अमल होना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि स्थानीय लोकतंत्र के लिए चुनाव समय पर होना बहुत जरूरी है।