Jharkhand civic Elections delayed : हाईकोर्ट ने पूछा- लोकतंत्र का गला क्यों घोंट रहे हो?
News India Live, Digital Desk: Jharkhand civic Elections delayed : झारखंड में नगर निकाय चुनावों को लेकर मामला गरमाता जा रहा है। चुनाव कराने में हो रही लगातार देरी पर अब झारखंड हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है। अदालत ने इस मामले में सीधे राज्य के मुख्य सचिव को तलब करते हुए पूछा है कि आखिर चुनाव कराने में इतनी देरी क्यों हो रही है? अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद राज्य सरकार पर दबाव काफी बढ़ गया है।
कब होंगे चुनाव, जनता पूछ रही सवाल
सोचिए, आपके शहर में मेयर न हो, वार्ड पार्षद न हो, तो छोटी-छोटी समस्याओं जैसे- गली की नाली जाम, सड़क पर कचरे का ढेर या फिर स्ट्रीट लाइट खराब होने पर आप किसके पास जाएंगे? कुछ ऐसी ही स्थिति झारखंड के कई शहरों में बनी हुई है। जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म हो चुका है और नए चुनाव कब होंगे, इसका कोई ठोस जवाब किसी के पास नहीं है। इस वजह से न सिर्फ विकास के काम रुके पड़े हैं, बल्कि आम जनता को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती, मांगा जवाब
इस मामले पर दायर एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार के रवैये पर तल्ख टिप्पणी की है। जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने साफ-साफ कहा कि सरकार लोकतंत्र का गला घोंट रही है और जानबूझकर चुनाव टाल रही है। अदालत ने कहा कि समय पर चुनाव कराना संवैधानिक जिम्मेदारी है और सरकार इससे बच नहीं सकती।
इससे पहले भी सरकार ने कोर्ट में चार महीने के अंदर चुनाव कराने का भरोसा दिया था, लेकिन वो समय-सीमा भी बीत गई। सरकार की ओर से बार-बार समय मांगे जाने पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए मुख्य सचिव और नगर विकास विभाग के अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी कर दिया है। अब इन सभी अधिकारियों को तीन हफ्ते के भीतर जवाब देना होगा और अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से हाजिर भी होना होगा।
क्या OBC आरक्षण है देरी की वजह?
सरकार की तरफ से दलील दी जा रही है कि ओबीसी आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट सर्वे की प्रक्रिया चल रही है, जिसके कारण देरी हो रही है। हालांकि, अदालत इस दलील से संतुष्ट नजर नहीं आ रही है। याचिकाकर्ता का कहना है कि चुनाव न होने से जनकल्याण की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं और नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
अब सबकी निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां सरकार को यह बताना होगा कि वो चुनाव कराने को लेकर कितनी गंभीर है और राज्य के शहरों को उनके जनप्रतिनिधि कब मिलेंगे।