Jharkhand : एशिया के सबसे बड़े साल जंगल सारंडा को मिला जीवनदान, सुप्रीम कोर्ट ने सभी खनन गतिविधियों पर लगाई रो
News India Live, Digital Desk: पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बार फिर एक ऐतिहासिक और बेहद कड़ा फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित एशिया के सबसे बड़े साल वन, सारंडा जंगल में होने वाली सभी तरह की खनन (Mining) गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. यह फैसला उन तमाम पर्यावरण प्रेमियों के लिए एक बड़ी जीत है जो सालों से इस अनमोल जंगल को बचाने की लड़ाई लड़ रहे थे.
क्या है सुप्रीम कोर्ट का यह बड़ा आदेश?
यह आदेश जंगलों को बचाने के लिए चल रहे भारत के सबसे लंबे और सबसे महत्वपूर्ण मामले, टी.एन. गोदावरमन बनाम भारत संघ, की सुनवाई के दौरान आया है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि सारंडा के जंगल में जिन भी खनन पट्टों (Mining Leases) को 12 दिसंबर, 1996 के बाद नवीनीकृत (Renew) किया गया था, उन्हें तुरंत अपना काम बंद करना होगा.
अदालत ने कहा कि 1996 के गोदावरमन मामले में दिए गए फैसले के बाद, किसी भी लीज का नवीनीकरण एक "नई लीज" ही माना जाएगा, और इसके लिए वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के तहत केंद्र सरकार से नए सिरे से मंजूरी लेना अनिवार्य था. जांच में पाया गया कि सारंडा में कई कंपनियों की लीज को बिना इस अनिवार्य मंजूरी के ही रिन्यू कर दिया गया था, जो सीधे-सीधे सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश का उल्लंघन था.
क्यों खास है सारंडा का जंगल?
सारंडा का जंगल सिर्फ पेड़ों का एक झुंड नहीं है. यह 800 वर्ग किलोमीटर में फैला एशिया का सबसे घना और सबसे बड़ा साल (Sal) का जंगल है. यह अनगिनत जंगली जीवों का घर है और इस क्षेत्र के पर्यावरण को संतुलित रखने के लिए 'फेफड़ों' की तरह काम करता है. विडंबना यह है कि यह जंगल बेशकीमती लौह अयस्क (Iron Ore) के भंडार पर भी बैठा है, और यही वजह है कि खनन कंपनियां दशकों से यहां खुदाई करती आ रही थीं.
कैसे सामने आया यह पूरा मामला?
यह मामला तब सामने आया जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त की गई केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) ने इस क्षेत्र में हो रहे खनन की जांच की. कॉमन कॉज नामक एक एनजीओ की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने CEC को जांच का जिम्मा दिया था. CEC ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि 1996 के बाद भी यहां अवैध तरीके से लीज का नवीनीकरण होता रहा, जिससे जंगल को भारी नुकसान पहुंचा.
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला साफ संदेश देता है कि देश के पर्यावरण और जंगलों की कीमत पर किसी भी तरह के औद्योगिक विकास की इजाजत नहीं दी जा सकती. यह आदेश सारंडा के जंगल को बचाने और उसके घावों को भरने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा.