Jharkhand : एक नर्स संभाल रही 320 बेड वाला टीबी सैनिटोरियम, रांची में स्वास्थ्य विभाग की घोर अनदेखी
News India Live, Digital Desk: झारखंड के रांची में स्थित इटकी टीबी सैनिटोरियम, जो दशकों से क्षय रोग (Tuberculosis - TB) के उपचार में एक महत्वपूर्ण संस्थान रहा है, कर्मचारियों की भारी कमी के कारण गंभीर कुप्रबंधन का सामना कर रहा है. एक चौंकाने वाले खुलासे में यह सामने आया है कि पिछले कई वर्षों से यह विशाल अस्पताल परिसर सिर्फ एक नर्स के भरोसे चल रहा है, जिससे मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग गया है.
इटकी टीबी सैनिटोरियम में लापरवाही का विवरण:
- एक नर्स पर निर्भरता: यह संस्थान, जिसमें 320 बेड हैं और कभी यहां टीबी मरीजों के लिए विशेष सेवाएं प्रदान की जाती थीं, अब दशकों से केवल एक नर्स के सहारे संचालित हो रहा है. यह स्टाफ की कमी का एक गंभीर उदाहरण है.
- चिकित्सा कर्मचारियों का अभाव: केवल नर्स ही नहीं, अस्पताल में डॉक्टर, तकनीशियन और अन्य सहायक कर्मचारियों की भी भारी कमी है. मरीजों को समुचित चिकित्सा सुविधाएँ और ध्यान नहीं मिल पा रहा है.
- टीबी नियंत्रण कार्यक्रम पर असर: भारत सरकार 'टीबी मुक्त भारत' अभियान चला रही है, लेकिन इस तरह की लापरवाही उस लक्ष्य को प्राप्त करने में बड़ी बाधा बन रही है. उचित कर्मचारियों के बिना मरीजों की नियमित देखभाल और दवाओं का वितरण प्रभावित होता है.
- इन्फ्रास्ट्रक्चर का दुरुपयोग: सैनिटोरियम की विशाल इमारतें और उपलब्ध बुनियादी ढांचा, उचित मानव संसाधन की कमी के कारण बेकार पड़ा हुआ है. लाखों रुपये के सरकारी निवेश का कोई सार्थक उपयोग नहीं हो पा रहा है.
- राज्य सरकार की लापरवाही: इस गंभीर समस्या पर राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से दशकों से ध्यान न देना चिंताजनक है. नियुक्तियों की कमी और मौजूदा कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के कारण यह स्थिति बनी है.
इस मामले से स्पष्ट है कि स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर कमी है और यह सीधे तौर पर उन मरीजों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है जो टीबी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं. इस संस्थान को तत्काल पर्याप्त चिकित्सा कर्मचारियों की आवश्यकता है ताकि यह अपने उद्देश्य को पूरा कर सके और टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य में योगदान कर सके.