असिस्टेंट के असिस्टेंट से मिलना शर्म की बात नहीं, प्रियंका चोपड़ा ने सिखाया सफलता का सबसे बड़ा पाठ

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News India Live, Digital Desk: आज जब हम प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) को देखते हैं, तो एक 'ग्लोबल स्टार' दिखाई देती हैं। वो रेड कार्पेट पर चलती हैं तो दुनिया देखती रह जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मुंबई की "देसी गर्ल" से लॉस एंजेलिस की "हॉलीवुड डीवा" बनने का यह सफर इतना भी आसान नहीं था? अक्सर हमें सिर्फ सफलता दिखती है, लेकिन उसके पीछे की रगड़ और मेहनत नहीं।

हाल ही में प्रियंका की मैनेजर अंजुला आचार्य ने उन दिनों का एक किस्सा साझा किया है, जब प्रियंका अमेरिका में अपनी जमीन तलाश रही थीं। यह किस्सा उन सभी लोगों के लिए एक सबक है जिन्हें लगता है कि बड़ा बनने के बाद छोटा काम करने में शर्म आती है।

अपना 'स्टारडम' भारत में छोड़कर गई थीं प्रियंका

जब प्रियंका अमेरिका गई थीं, तब वो भारत में एक स्थापित सुपरस्टार थीं। यहां उनके आगे-पीछे लोगों की लाइन लगती थी। लेकिन अमेरिका में? वहां वो एक नया चेहरा थीं। उनकी मैनेजर ने बताया कि प्रियंका में जरा सा भी घमंड नहीं था। उन्होंने अपनी मैनेजर से साफ कह दिया था—"मुझे काम करना है और मैं किसी से भी मिलने को तैयार हूँ।"

"असिस्टेंट के असिस्टेंट" से मीटिंग

अंजुला ने बताया कि आमतौर पर जब कोई बड़ा स्टार होता है, तो वो सीधा प्रोड्यूसर या डायरेक्टर से मिलना चाहता है। लेकिन प्रियंका का रवैया बिल्कुल अलग था। वो अपना ईगो आड़े नहीं आने देती थीं। उन्हें यह समझाने में कोई शर्म नहीं थी कि वो कौन हैं।

कहा जाता है कि प्रियंका ने नेटवर्किंग के लिए न सिर्फ बड़े लोगों से, बल्कि "असिस्टेंट के असिस्टेंट" तक से मुलाकातें कीं। जी हां, उन्होंने उन लोगों को भी अपनी प्रोफाइल दिखाई और उनसे काम को लेकर चर्चा की, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। उनकी सोच थी कि काम कहीं से भी आ सकता है, बस दरवाजे खटखटाते रहो।

आज दुनिया है कदमों में

प्रियंका की यही विनम्रता (Humility) और 'कभी हार न मानने' (Never give up) वाला जज्बा रंग लाया। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर आपको ऊंचाई पर उड़ना है, तो जमीन से जुड़कर शुरुआत करने में कोई बुराई नहीं है। वो भारत में रानी थीं, लेकिन विदेश में उन्होंने एक न्यूकमर की तरह जी-तोड़ मेहनत की।

आज प्रियंका के पास सिटाडेल जैसी बड़ी सीरीज और हॉलीवुड फिल्में हैं। यह सफलता उसी मेहनत का फल है जो उन्होंने उन छोटे-छोटे कमरों में असिस्टेंट्स से मिलते हुए की थी। वाकई, प्रियंका चोपड़ा की यह कहानी बताती है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता