India's strategic Defense : 2026 की एक बड़ी हकीकत भारतीय वायुसेना के उस प्रहार ने कैसे बदल दी पड़ोसी देश की रणनीति?
News India Live, Digital Desk: पड़ोसी देशों के बीच तनाव की खबरें हम अक्सर सुनते रहते हैं, लेकिन कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जिनका असर महीनों या सालभर नहीं, बल्कि दशकों तक महसूस किया जाता है। बात हो रही है भारतीय वायुसेना (IAF) की उस रणनीतिक ताकत की, जिसकी गूँज आज साल 2026 में भी सुनाई दे रही है। आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत ने पाकिस्तान के जिन एयरबेस और मिलिट्री इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया था, उनकी मरम्मत का काम पाकिस्तान आज भी पूरा नहीं कर पाया है।
वो चोट, जिसकी कसक आज भी है
रक्षा विशेषज्ञों और सैटेलाइट इमेज के हवाले से जो जानकारी सामने आ रही है, वो काफी दिलचस्प है। खबर है कि पाकिस्तानी एयरफोर्स के कई प्रमुख ठिकानों पर हुए नुकसान के निशान 2026 की शुरुआत में भी देखे जा सकते हैं। आमतौर पर सेनाएं अपनी चौकियां और बेस फौरन दुरुस्त कर लेती हैं, लेकिन जब नुकसान इतना गहरा हो कि बजट और तकनीक दोनों कम पड़ जाएं, तो तस्वीर कुछ ऐसी ही होती है जैसी इस वक्त सीमा पार दिख रही है।
आखिर मरम्मत में इतनी देरी क्यों?
सवाल यह उठता है कि आखिर पाकिस्तान को इन एयरबेसों को ठीक करने में इतने साल क्यों लग रहे हैं? इसके पीछे कुछ बड़ी वजहें समझ आती हैं:
- गहरा डैमेज: भारतीय हमले इतने सटीक थे कि बुनियादी ढांचे की जड़ें हिल गईं।
- आर्थिक तंगी: यह किसी से छिपा नहीं है कि पड़ोसी देश की आर्थिक स्थिति नाजुक है। ऐसे में सेना पर भारी खर्च करना और फिर से वही चमक वापस लाना उनके लिए पहाड़ जैसा काम है।
- रणनीतिक दबाव: भारतीय सीमा पर लगातार चौकसी और मॉडर्न डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान को अपने एयरबेसों के डिजाइन में बार-बार बदलाव करने पर मजबूर कर दिया है।
क्या ये भारत की कूटनीतिक जीत है?
इसे केवल एक सैन्य हमला कहना शायद कम होगा। यह भारत की 'स्ट्रेटेजिक गहराई' का परिणाम है। साल 2026 में जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो समझ आता है कि भारत ने सिर्फ दुश्मन को डराया नहीं, बल्कि उसे तकनीकी और बुनियादी तौर पर पीछे धकेल दिया। आज स्थिति यह है कि पाकिस्तान रक्षा बजट और रिपेयरिंग के बीच फंसा हुआ है, जबकि भारतीय वायुसेना आधुनिक ड्रोन और स्वदेशी तकनीक से लैस होकर और भी मजबूत हो चुकी है।
एक नया दौर
आज के समय में युद्ध सिर्फ बॉर्डर पर नहीं, बल्कि रसद और इंफ्रास्ट्रक्चर के लेवल पर भी लड़ा जाता है। भारत ने यह साफ कर दिया है कि उसकी संप्रभुता से खिलवाड़ करने का अंजाम क्या होता है। पाकिस्तान में जारी यह मरम्मत की जद्दोजहद इसी बात की गवाह है।
आने वाले दिनों में देखना होगा कि डिफेंस और जियोपॉलिटिक्स में और क्या नए मोड़ आते हैं, लेकिन फिलहाल इतना तो तय है कि भारत की वो चोट आज भी अपना काम कर रही है।