Indian Army : पहलगाम हमले के बाद वाजपेयी ने सेना को दी थी पूरी छूट नरवणे का खुलासा

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Newsindia live,Digital Desk: Indian Army : नई दिल्ली सेना के पूर्व प्रमुख जनरल एम एम नरवणे ने अपनी नई किताब में कुछ बेहद दिलचस्प खुलासे किए हैं उन्होंने जुलाई दो हजार में अमरनाथ यात्रा के दौरान पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का जिक्र करते हुए लिखा है कि तब सेना को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अगले ही दिन पूरी तरह खुली छूट यानी हरी झंडी दे दी थी इसके बाद जो हुआ वह बेहद महत्वपूर्ण था नरवणे ने तब एक युवा अधिकारी के तौर पर इंटेलिजेंस शाखा में अपनी सेवा दी थी यह हमला चौबीस पच्चीस जुलाई की दरमियानी रात को हुआ था इसमें बाईस से छब्बीस अमरनाथ श्रद्धालु सुरक्षा कर्मी और स्थानीय नागरिक मारे गए थे हमले में एक भारतीय बटालियन के मुख्यालय के बगल में स्थित अस्थायी बाजार को निशाना बनाया गया था

नरवणे अपनी आत्मकथा फोर स्टार्स टू डेस्टिनी में बताते हैं आतंकवादी उस स्थान पर गए जहां आम तौर पर बड़ी संख्या में पर्यटक एकत्रित होते हैं नरवणे लिखते हैं कि यह सिर्फ दो हजार में ही एक आतंकवादी घटना नहीं थी इसके पहले मार्च में चिट्ठी सिंह पुरा नरसंहार और श्रीनगर में गैराकादल कार्यालय के पास एक हमले के रूप में कश्मीर घाटी को झकझोरने वाली अन्य बड़ी घटनाएं भी हुईं थीं लेकिन प्रधानमंत्री वाजपेयी के साथ बैठक के कारण सेना की गतिविधियों को बल मिला नरवणे लिखते हैं मैं अगले दिन प्रधानमंत्री निवास पर आयोजित एक संक्षिप्त खुफिया ब्रीफिंग में था

पूर्व सेना प्रमुख लिखते हैं बैठक प्रधानमंत्री आवास पर थी तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस गृह सचिव रक्षा सचिव और तीनों सेनाओं के प्रमुखों को इस मीटिंग में बुलाया गया था सेना प्रमुख ने कहा प्रधानमंत्री शांत स्वभाव से कुर्सी पर बैठे थे और मीटिंग समाप्त होते ही उनके अंतिम शब्द एक निर्देश के तौर पर कहे गए आप जो भी करें अपनी मर्जी से करें सेना को काम करने की पूरी छूट दी गई उन्होंने हमें हरी झंडी दिखा दी उन्होंने आगे बताया इन ऑपरेशन को प्रधानमंत्री की इस हरी झंडी ने इतना बढ़ावा दिया कि हम आतंकवादियों के पीछे पड़े नरवणे के अनुसार इससे खुफिया रिपोर्ट एकत्र करने और उसके अनुसार आतंकवादियों के खात्मे की जिम्मेदारी वाले मेरे सहित युवा अधिकारी खुद को और अधिक मजबूत महसूस कर रहे थे

बाद में पहलगाम हमला करने वालों में से अधिकांश को मार गिराया गया या गिरफ्तार कर लिया गया इस घटना का मनोवैज्ञानिक असर लगभग समाप्त हो गया और फिर से भरोसा बढ़ा घाटी में सामान्य जनजीवन फिर से शुरू होने लगा सेना के ऑपरेशन और ज्यादा मजबूत हो गए नरवणे की किताब भारतीय सेना के राजनीतिक और रणनीतिक इतिहास के कई दिलचस्प किस्सों का विवरण देती है यह पाठकों को विभिन्न राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर अंदरूनी दृष्टिकोण प्रदान करती है

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