मेघालय के लिविंग रूट ब्रिज यूनेस्को की दौड़ में, 2026-27 चक्र के लिए भारत ने सौंपा नामांकन
News India Live, Digital Desk : मेघालय के गौरव और इंजीनियरिंग के अद्भुत नमूने 'लिविंग रूट ब्रिज' (Living Root Bridges) ने वैश्विक मंच पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत ने आधिकारिक तौर पर 29 जनवरी 2026 को पेरिस में यूनेस्को (UNESCO) के पास इनका नामांकन डोजियर (Nomination Dossier) जमा कर दिया है। यदि इसे स्वीकार कर लिया जाता है, तो ये संरचनाएं विश्व धरोहर सूची (World Heritage List) का हिस्सा बन जाएंगी।
जिंगकिएंग जरी: प्रकृति और मानव का संगम
स्थानीय रूप से 'जिंगकिएंग जरी' (Jingkieng Jri) या 'ल्यू चराई' के नाम से मशहूर ये पुल खासी और जयंतिया हिल्स के दक्षिणी ढलानों पर स्थित हैं। ये केवल पुल नहीं, बल्कि सदियों पुरानी स्वदेशी बायो-इंजीनियरिंग के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
इनकी अनूठी विशेषताएं:
रबड़ के पेड़ की जड़ें: इन्हें Ficus elastica (रबड़ अंजीर) के पेड़ों की हवाई जड़ों (Aerial roots) को दिशा देकर बनाया जाता है।
समय के साथ मजबूती: कंक्रीट या स्टील के विपरीत, ये पुल समय के साथ और भी मजबूत होते जाते हैं क्योंकि जड़ें बढ़ती और मोटी होती रहती हैं।
बाढ़ सहने की क्षमता: मेघालय दुनिया के सबसे अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में से एक है। ये पुल मानसून की भयानक बाढ़ को आसानी से झेल लेते हैं।
???? यूनेस्को नामांकन का महत्व
भारत द्वारा जमा किए गए डोजियर में इन पुलों को एक "जीवंत सांस्कृतिक परिदृश्य" (Living Cultural Landscape) के रूप में दर्शाया गया है। यूनेस्को की मान्यता मिलने से निम्नलिखित लाभ होंगे:
अंतरराष्ट्रीय पहचान: मेघालय की स्वदेशी परंपराओं को वैश्विक मंच पर सम्मान मिलेगा।
पर्यावरण-पर्यटन (Eco-tourism): इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय समुदायों की आय में वृद्धि होगी।
संरक्षण: इन नाजुक पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग और फंडिंग मिलने की राह आसान होगी।
ये पुल हमें क्या सिखाते हैं?
लिविंग रूट ब्रिज आधुनिक दुनिया के लिए स्थिरता (Sustainability) का एक बड़ा सबक हैं:
सामुदायिक ज्ञान: इन्हें बनाने की कला पीढ़ियों से मौखिक रूप से हस्तांतरित की जा रही है।
शून्य कार्बन फुटप्रिंट: इनके निर्माण में किसी कृत्रिम सामग्री का उपयोग नहीं होता, जो इन्हें पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल बनाता है।
दीर्घायु: एक अच्छी तरह से विकसित रूट ब्रिज 500 वर्षों से अधिक समय तक चल सकता है।